भदोही के कालीन भैया की कहानी: जब विजय मिश्र ने राजनीति को दी नई परिभाषा
भदोही से भारत क्रांति न्यूज की विशेष रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के एक छोटे से गांव से उठकर ‘कालीन भैया’ जैसा बनना और राजनीति के शिखर तक पहुंचना, विजय मिश्र की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। इसमें संघर्ष है, सत्ता का खेल है, बाहुबल है, और अंतहीन रोमांच।
कहानी की शुरुआत: एक सपने का जन्म
विजय मिश्र का जन्म एक साधारण परिवहन व्यवसायी परिवार में हुआ। 1980 के दशक में, भदोही का कालीन उद्योग अपने चरम पर था। विजय मिश्र ने भी यहां अपना भाग्य आजमाने का सोचा। वे एक कालीन व्यापारी के यहां काम करने लगे। लेकिन विजय मिश्र के व्यक्तित्व में कुछ खास था—उनकी आवाज की गूंज, उनकी तेज नजरें, और उनका हर काम समय पर पूरा करने का जुनून।
जल्दी ही उनकी पहचान इलाके में एक भरोसेमंद व्यापारी के रूप में बन गई। लेकिन कहते हैं, बड़ी सफलता के साथ बड़ी मुश्किलें आती हैं। व्यापार बढ़ने के साथ, इलाके के दबंग ठाकुर उदयभान से उनका टकराव शुरू हो गया।
राजनीति में एंट्री: जब संघर्ष ने बदली दिशा
उदयभान से टकराव ने विजय मिश्र को राजनीति में धकेल दिया। वे पंडित कमलापति त्रिपाठी से मिले, जो तत्कालीन राजनीति के बड़े नाम थे। कमलापति त्रिपाठी और राजीव गांधी के आशीर्वाद से विजय मिश्र ने राजनीति में कदम रखा और ब्लॉक प्रमुख बन गए।
यहीं से उनका असली सफर शुरू हुआ। अगले 10 साल तक वे न सिर्फ ब्लॉक प्रमुख रहे, बल्कि इलाके के सबसे प्रभावशाली नेता बन गए।
मुलायम सिंह यादव से दोस्ती और बड़ी उड़ान
2000 के दशक में, भदोही में शिवकरण यादव नामक एक बाहुबली नेता का दबदबा था। एक दिन शिवकरण ने मुलायम सिंह यादव को गाली दे दी। यह सुनकर मुलायम सिंह ने ठान लिया कि अब शिवकरण की राजनीति खत्म करनी है। विजय मिश्र को उन्होंने बुलाया और शिवकरण के खिलाफ खड़ा कर दिया।
विजय मिश्र ने ना सिर्फ शिवकरण को हराया, बल्कि मुलायम सिंह का विश्वास भी जीत लिया। इसके बाद 2002 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर वे विधायक बने और लगातार चार बार विधायक का चुनाव जीता।
दबंगई और लोकप्रियता का अनोखा मेल
विजय मिश्र सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहे। वे हर किसी की मदद के लिए खड़े रहते। भदोही से मुंबई तक, जहां भी उनके क्षेत्र का कोई व्यक्ति मुसीबत में होता, विजय मिश्र का एक फोन कॉल समस्या का समाधान कर देता।
उनके इलाके में कोई ऐसा घर नहीं था, जहां उनकी ओर से सोलर पैनल या हैंडपंप ना लगाया गया हो। हर त्योहार पर उनके भंडारे में लाखों लोग खाना खाते। उनकी छवि एक बाहुबली नेता की थी, लेकिन जनता का भरोसा उनके साथ हमेशा बना रहा।
मायावती से टकराव और नई चुनौतियां
2007 में, जब बसपा सरकार सत्ता में आई, तो मायावती ने विजय मिश्र को अपने पाले में लाने की कोशिश की। लेकिन विजय मिश्र ने प्रस्ताव ठुकरा दिया। इसके बाद उनके खिलाफ सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल शुरू हुआ।
यहां तक कि उनके एनकाउंटर के आदेश तक जारी हो गए। इस मुश्किल घड़ी में मुलायम सिंह यादव ने उन्हें बचाया। लेकिन राजनीति की यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई।
2017 में वापसी और भाजपा से तालमेल
2017 के चुनाव में, जब अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया, तो विजय मिश्र ने हार मानने के बजाय निषाद पार्टी से चुनाव लड़ा। भाजपा की लहर के बावजूद उन्होंने अपनी सीट बचाई और यह दिखा दिया कि उनके लिए जनता का समर्थन सबसे बड़ी ताकत है।
2019 तक उन्होंने भाजपा नेताओं से भी अच्छे संबंध बनाए और राज्यसभा चुनाव में भाजपा को वोट दिया। लेकिन राजनीति में स्थायी दोस्त और दुश्मन नहीं होते। मुकदमों का दौर बढ़ा और विजय मिश्र को जेल भेज दिया गया।
कहानी का ट्विस्ट: कालीन भैया से माफिया तक
आज विजय मिश्र पर कई मुकदमे दर्ज हैं। विरोधी उन्हें माफिया कहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब वे चार बार विधायक बने, तब क्या वे माफिया नहीं थे? जब भाजपा और सपा ने उनके समर्थन का फायदा उठाया, तब वे बाहुबली क्यों नहीं माने गए?
आखिरी अध्याय अभी बाकी है
विजय मिश्र की कहानी में हर वो मसाला है, जो इसे दिलचस्प बनाता है। वे एक ऐसे नेता हैं, जो जनता के दिलों में राज करते थे, लेकिन सत्ता के खेल में फंस गए। उनकी कहानी सिखाती है कि राजनीति में सब कुछ संभव है—चढ़ाई भी और गिरावट भी।
क्या विजय मिश्र एक बार फिर वापसी करेंगे? या यह कहानी यहीं खत्म हो जाएगी?
“भदोही के कालीन भैया” की कहानी अभी अधूरी है। इंतजार कीजिए अगले अध्याय का!
भदोही से भारत क्रान्ति न्यूज की विशेष रिपोर्ट
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.



