अग्नि-5 MIRV तकनीक: भारत ने चीन और पाकिस्तान के लिए बढ़ाई परमाणु चुनौती

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

अग्नि-5 और MIRV तकनीक: भारत चीन के सामने तेजी से बढ़ा रहा अपनी परमाणु ताकत

नई दिल्ली: भारत ने 2024 और 2025 में अपनी परमाणु क्षमता में तेजी से सुधार किया है। इसका मुख्य हथियार है अग्नि-5 मिसाइल और इसका MIRV वैरिएंट। MIRV का मतलब है Multiple Independently Targetable Reentry Vehicle, यानी एक ही मिसाइल से एक समय में कई लक्ष्यों पर वार करना संभव। यह तकनीक भारत को एशिया में परमाणु संतुलन में मजबूती देती है और चीन और पाकिस्तान के लिए रणनीतिक संदेश भी है।


अग्नि-5 मिसाइल: भारत की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल

भारत ने अगस्त 2025 में ओडिशा के एक प्रक्षेपण स्थल से अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया।

मुख्य विशेषताएँ:

  • डेवलपर: DRDO (Defence Research & Development Organisation)

  • प्रकार: तीन चरणों वाली इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM)

  • मारक क्षमता: 5,000 किलोमीटर से अधिक

  • विशेषता: MIRV वैरिएंट से एक मिसाइल से कई लक्ष्य

  • रणनीतिक लाभ: चीन और पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में परमाणु वारहेड तैनात करना संभव

इस मिसाइल का अगला एडवांस वैरिएंट 7,500 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है, जिससे भारत की स्ट्रैटजिक रेंज और बढ़ जाएगी।


MIRV तकनीक: एक मिसाइल, कई वारहेड

MIRV तकनीक भारत के परमाणु शस्त्रागार में बड़ा बदलाव लाती है। इसके फायदे:

  • कई लक्ष्यों पर हमला: एक ही मिसाइल से दुश्मन के कई ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।

  • रणनीतिक संदेश: चीन को यह बताने के लिए कि भारत डिप्लोमेसी और परमाणु शक्ति दोनों में सक्षम है

  • पाकिस्तान के लिए चुनौती: पाकिस्तान के पास चीन जैसी आधुनिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली नहीं है।

डिफेंस एनालिस्टों का मानना है कि MIRV तकनीक अपनाने से भारत अपने परमाणु डिटरेंस को मजबूत करता है और चीन को अपने एडवांस टेक्नोलॉजी से सावधान रहने का संकेत देता है।


भारत, चीन और पाकिस्तान का परमाणु संतुलन

  • भारत: 2025 में 180 परमाणु वारहेड (SIPRI रिपोर्ट)

  • चीन: लगभग 600 परमाणु वारहेड

  • पाकिस्तान: संख्या स्थिर, समुद्र-आधारित मिसाइल क्षमता नहीं

विशेष रूप से, अग्नि-5 का टेस्ट प्रधानमंत्री मोदी के एससीओ बैठक में चीन जाने से पहले किया गया था। इसका उद्देश्य साफ था: भारत ने यह संदेश दिया कि वह डिप्लोमेसी के साथ-साथ युद्धस्तर पर भी सक्षम है।


भारत की आगे की रणनीति

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को सिर्फ स्थलीय मिसाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। रणनीति में शामिल हो सकते हैं:

  1. समुद्र-आधारित प्रतिरोध (SSBNs)

  2. एयर लॉन्च विकल्प (विमान और ड्रोन)

  3. पूर्ण परमाणु त्रिकोण (Triad) मजबूत करना

डिफेंस एक्सपर्ट रजेस्वरी राजगोपालन ने बताया कि भारत के न्यूक्लियर स्ट्रैटजिस्ट चीन को काउंटर करने के लिए परमाणु वारहेड की संख्या 250 तक बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।


चीन भारत की क्षमता को कैसे देखता है

  • स्थिति: चीन अभी तक भारत को सीधे खतरा नहीं मानता।

  • चिंता का कारण: अग्नि-5 और MIRV तकनीक चीन के लिए रणनीतिक जटिलता पैदा करती है।

  • NFU नीति: चीन ने “No First Use” नीति अपनाई है, लेकिन भारत की बढ़ती क्षमता के कारण बीजिंग लचीलापन दिखा सकता है।

एशिया सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार, चीन और भारत दोनों ही अनावश्यक बयानबाजी से बचते हैं, लेकिन अग्नि-5 और MIRV तकनीक ने बीजिंग के लिए चिंता बढ़ा दी है।


निष्कर्ष

अग्नि-5 और MIRV तकनीक से भारत ने:

  • अपनी परमाणु शक्ति में तेजी से वृद्धि की

  • चीन और पाकिस्तान को रणनीतिक संदेश दिया

  • एशिया में परमाणु संतुलन में नया मोड़ लाया

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत के मिसाइल और पनडुब्बी प्रोजेक्ट्स तय करेंगे कि चीन की परमाणु चुनौती का कितना प्रभावी जवाब भारत दे सकता है।

Ashu Jha : Bharat Kranti News
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

Leave a Comment

और पढ़ें

Ai / Market My Stique Ai

Read More Articles