डरावनी साजिश: डिजिटल अरेस्ट में फंसे एनआरआई, बहन और बैंक अधिकारी, ठगों ने 2.90 करोड़ लूटे!
भारत क्रांति न्यूज़ डेस्क, लखनऊ।
लखनऊ में एक चौंकाने वाली साइबर ठगी ने साबित कर दिया है कि जालसाजों की कुटिल योजनाएं कितनी खतरनाक हो सकती हैं। खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताने वाले ठगों ने पहले एनआरआई, उनकी बहन और फिर एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को निशाना बनाया। चार दिनों तक मानसिक दबाव डालते हुए ठगों ने इन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा और 2.90 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। यह मामला डरावना भी है और जागरूकता के लिए एक कड़ी चेतावनी भी।
कैसे फंसाया डिजिटल जाल में?
कनाडा निवासी सुमन कक्कड़ कुछ महीनों पहले लखनऊ के इंदिरानगर में अपने घर आई थीं। 25 नवंबर को उन्हें व्हाट्सएप कॉल आई। कॉलर ने अपना नाम “अभिषेक चौहान” बताते हुए कहा कि वह मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी है। उसने आरोप लगाया कि सुमन के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किया गया है और उनका नाम आतंकवादियों से जुड़ा है।
सुमन के डर का फायदा उठाते हुए ठगों ने उनसे कहा कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें गोपनीय जांच में सहयोग करना होगा। अगले दिन जब उनकी बहन विनय थपलियाल घर आईं, तो ठगों ने वीडियो कॉल पर उसे भी आरोपी घोषित कर दिया। दोनों बहनों को लगातार चार दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया।
बैंक खाते खाली करवा लिए
ठगों ने गिरफ्तारी से बचाने के बहाने एफडी तुड़वाकर सुमन और उनकी बहन से भारी रकम ट्रांसफर करवाई।
26 नवंबर: सुमन ने तीन अलग-अलग खातों में क्रमशः 17 लाख, 14.77 लाख और 14.20 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
28 नवंबर: विनय ने 1.42 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
रिटायर्ड बैंक अफसर भी बने शिकार
ऐशबाग निवासी और कैनरा बैंक से सेवानिवृत्त प्रभात कुमार को भी 26 नवंबर को एक व्हाट्सएप कॉल आई। कॉलर ने अपना नाम “अजय कुमार बंसल” बताते हुए कहा कि उनका आधार कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इस्तेमाल हुआ है। ठगों ने प्रभात कुमार को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और उन्हें एफडी पर लोन लेकर पैसे ट्रांसफर करने को मजबूर कर दिया।
प्रभात ने ठगों के कहने पर 28 और 29 नवंबर को कुल 1.02 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
खौफनाक सच: आपके साथ भी हो सकता है ऐसा!
साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए अत्यधिक डरावना तरीका अपनाया। “डिजिटल अरेस्ट” यानी फोन और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को मानसिक रूप से जकड़ना और उन्हें विश्वास दिलाना कि वे गंभीर कानूनी संकट में हैं। अपराधियों का आत्मविश्वास और उनकी बातों की योजना इतनी पुख्ता थी कि पीड़ित पूरी तरह उनके झांसे में आ गए।
सावधान रहें, जागरूक बनें
1. व्हाट्सएप कॉल पर किसी अज्ञात व्यक्ति से बात न करें।
2. कभी भी बैंक खाते की जानकारी साझा न करें।
3. किसी भी कानूनी मामले में पहले संबंधित पुलिस थाने या वकील से संपर्क करें।
4. बैंक से संबंधित कोई भी निर्णय लेने से पहले बैंक से पुष्टि करें।
पुलिस की जांच जारी
पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए बंधन बैंक और आईसीआईसीआई बैंक खातों की पहचान की जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित गैंग का काम है।
“डिजिटल अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। सतर्क रहें और ऐसी किसी भी घटना पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।”- साइबर क्राइम पुलिस अधिकारी
यह घटना हर किसी के लिए एक चेतावनी है। याद रखें, आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है।
रिपोर्ट: आशु झा | मुख्य संपादक: शिव शंकर दुबे | भारत क्रांति न्यूज़
Author: Bharat Kranti News
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