जूना अखाड़े के महंत कौशल गिरी को सात साल के लिए निष्कासित, नाबालिग साध्वी को घर भेजा गया

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जूना अखाड़े का निर्णय: महंत कौशल गिरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, नाबालिग बालिका को घर भेजा गया

प्रयागराज: महाकुंभ 2025 की तैयारी के बीच जूना अखाड़े से जुड़े एक गंभीर मामले ने धार्मिक समाज में हलचल मचा दी है। आगरा की 13 वर्षीय नाबालिग बालिका को साध्वी के रूप में दान स्वरूप प्राप्त करने के बाद जूना अखाड़े के महंत कौशल गिरी को सात साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। इस निर्णय से महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन से पहले अखाड़ा परिषद की सख्त कार्रवाई साफ संदेश देती है कि किसी भी धर्मगुरु या संस्था को धर्म के नाम पर गलत कार्यों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।


विवाद का कारण: नाबालिग को साध्वी बनाना

यह घटना तब सामने आई जब महंत कौशल गिरी ने आगरा की एक 13 वर्षीय बालिका को साध्वी बनाने का दावा किया और उसे दान स्वरूप प्राप्त किया। यह मामला समाज में हड़कंप मचा दिया और धार्मिक संगठन, महिला अधिकार समूह और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी कड़ी निंदा की। एक नाबालिग बालिका का धर्म के नाम पर दान किया जाना एक संवेदनशील मामला था, जो भारतीय कानून और धर्म दोनों के खिलाफ था।


पंचायत का अहम निर्णय

शुक्रवार को प्रयागराज में आयोजित विशेष पंचायत में यह मुद्दा गंभीरता से उठाया गया। रमता पंच की अध्यक्षता में हुई इस पंचायत में सभी प्रमुख संतों और अखाड़े के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस मामले पर गहन विचार-विमर्श किया। परिणामस्वरूप, महंत कौशल गिरी को सात साल के लिए अखाड़े से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, बालिका को उसके परिवार के पास वापस भेजने का भी आदेश दिया गया, ताकि उसे किसी भी प्रकार की मानसिक और शारीरिक पीड़ा से बचाया जा सके।


नाबालिग के परिवार को भेजा गया संदेश

पंचायत के निर्णय में यह भी स्पष्ट किया गया कि जूना अखाड़ा बालिका के परिवार के साथ सहयोग करेगा और उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाएगा। यह संदेश साफ था कि बालिका का पालन-पोषण और सुरक्षा प्राथमिकता है, और धर्म के नाम पर उसे किसी के स्वार्थ का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा।


महाकुंभ की पवित्रता बनाए रखने का संकल्प

महाकुंभ जैसे ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं और संतों की पवित्रता और अनुशासन की अहम भूमिका होती है। इस मामले से पहले ही यह स्पष्ट हो गया था कि महाकुंभ की पवित्रता को बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस कठोर निर्णय ने यह साबित कर दिया कि किसी भी स्थिति में धर्म और समाज के मूल्य और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जाएगा।


सामाजिक संदेश

यह घटना समाज को यह भी समझाती है कि किसी भी धर्म या परंपरा का पालन करते समय नैतिकता और कानून का पालन भी आवश्यक है। महाकुंभ की तरह बड़े धार्मिक आयोजनों में इस प्रकार के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति या संस्था धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर गलत कार्य न कर सके।


अखाड़ा परिषद का बयान

जूना अखाड़े के प्रमुख संतों और अखाड़ा परिषद ने इस निर्णय को समाज और धार्मिक परंपराओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी के रूप में देखा है। उनका कहना है कि इस निर्णय से यह साफ संदेश जाता है कि कोई भी संस्था या धर्मगुरु धर्म के नाम पर अवैध या अमानवीय कार्यों को नहीं बढ़ावा दे सकता।


महाकुंभ की तैयारी और भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने की योजना

जूना अखाड़ा और अखाड़ा परिषद ने महाकुंभ 2025 की तैयारियों के बीच यह भी ऐलान किया कि भविष्य में किसी भी तरह के अनुशासनहीनता या विवादित घटनाओं से निपटने के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, ऐसे मामलों की त्वरित जांच और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


निष्कर्ष

इस घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि धर्म, समाज और कानून का पालन सभी के लिए अनिवार्य है। जूना अखाड़ा का यह कदम न केवल धर्म की पवित्रता को बनाए रखने के लिए था, बल्कि यह समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। अब यह देखना होगा कि महाकुंभ 2025 के दौरान सभी संत और अनुयायी इस कड़े निर्णय को स्वीकार कर, धर्म और अनुशासन का पालन करें।

(रिपोर्ट: आशु झा, संपादक: पवन उपाध्याय , भारत क्रांति न्यूज)

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Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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