भारत-यूएस ट्रेड डील पटरी पर लौट रही, लेकिन H-1B वीजा पर अमेरिका का रुख सख्त
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर लंबे समय से चली आ रही तनातनी में अब नरमी आने के संकेत मिल रहे हैं। हालिया दिनों में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक ने इस ओर इशारा किया है कि बहुप्रतीक्षित भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब पटरी पर लौट रही है। हालांकि, इस बातचीत में H-1B वीज़ा को लेकर भारत को कोई सकारात्मक खबर नहीं मिली।
H-1B वीजा को रखा गया अलग
भारतीय डेलिगेशन का नेतृत्व मुख्य व्यापार वार्ताकार राजेश अग्रवाल ने किया, जिन्होंने अमेरिका के वाणिज्य प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात की। इस मुलाकात को औपचारिक वार्ता का दर्जा नहीं दिया गया, लेकिन इसे दोनों पक्षों के लिए “उपयोगी” बताया गया।
अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कहा कि H-1B वीज़ा का मुद्दा ट्रेड डील से पूरी तरह अलग है। यह एक वैश्विक नीति का हिस्सा है और इसमें किसी तरह के बदलाव के लिए अमेरिकी कानून में बदलाव की आवश्यकता होगी। इसलिए भारत चाहे जितना जोर डाले, वीजा पॉलिसी को व्यापार समझौते के तहत नहीं रखा जाएगा।
यह रुख भारत के आईटी सेक्टर और लाखों भारतीय पेशेवरों के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से H-1B वीज़ा प्रक्रिया को आसान बनाने की उम्मीद कर रहे थे।
रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव
बैठक में रूस से कच्चे तेल की खरीद सबसे अहम मुद्दा रहा। अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी रूसी तेल पर निर्भरता कम करे और इस तरह रूस पर दबाव बने ताकि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
इसी विवाद की वजह से अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया है। हालांकि, भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मसला दोनों देशों के बीच आगे भी बड़ा विवाद बना रह सकता है।
भारत के लिए घट सकता है टैरिफ
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा मसलों को हल करने के बाद भारत के लिए एक नया टैरिफ प्रतिशत तय होगा। यह भारत के लिए राहत की बात हो सकती है, क्योंकि अमेरिका भारत से कई सामानों पर ऊंचे आयात शुल्क लेता है।
इसके अलावा, अमेरिकी पक्ष ने संकेत दिया कि अगर भारत सरकार अमेरिका में निवेश बढ़ाने पर ध्यान देती है तो व्यापारिक रिश्तों में और मजबूती आ सकती है।
ऊर्जा क्षेत्र: साझेदारी की नई संभावनाएं
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इन दिनों अमेरिका दौरे पर हैं। वहां उन्होंने अमेरिकी कंपनियों के टॉप अधिकारियों से मुलाकात की और निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।
गोयल ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अमेरिका एक अहम साझेदार है। उन्होंने अमेरिका में विकसित हो रहे Small Modular Reactors (SMR) जैसी तकनीकों में भी रुचि दिखाई। यह तकनीक भविष्य में भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है।
दोनों देशों के बीच यह सहयोग सिर्फ पारंपरिक ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी के क्षेत्रों में भी बढ़ सकता है।
भारत की रणनीति: ऊर्जा से रिश्ते मजबूत करना
पिछले कुछ महीनों में भारत ने अमेरिका से तेल आयात बढ़ाया है। इसे विशेषज्ञ अमेरिका के साथ रिश्ते बेहतर करने और ट्रेड डील के लिए अनुकूल माहौल बनाने की रणनीति मान रहे हैं।
भारत जानता है कि ऊर्जा आयात बढ़ाकर वह अमेरिका को आर्थिक रूप से संतुष्ट कर सकता है, जिससे अन्य विवादित मुद्दों (जैसे टैरिफ और ट्रेड बैलेंस) में भी राहत मिलने की संभावना है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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