छत्तीसगढ़: माओवादी अब ‘बोतल IED’ से बरपाना चाहते तबाही, इंद्रावती नेशनल पार्क में सुरक्षाबलों ने 5 विस्फोटक बरामद किए
रायपुर (Bharat Kranti News) |आशु झा एडिटर
छत्तीसगढ़ में माओवादी लगातार अपने हथियारों के तौर-तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। अब उन्होंने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए बीयर की खाली कांच की बोतलों को चुना है। इन बोतलों में विस्फोटक भरकर उन्हें बम की शक्ल दी जा रही है। सोमवार को इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान इलाके में सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने ऐसे 5 IED बरामद किए, जिनमें से दो ‘बोतल IED’ थे।
बम निरोधक दस्ते (EOD) ने मौके पर ही सभी बमों को निष्क्रिय कर दिया, वरना इनसे बड़ा हादसा हो सकता था।
ऑपरेशन की पूरी कहानी
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सीआरपीएफ, DRG और बम निरोधक टीम कांदलापाड़ती इलाके में तलाशी अभियान पर निकली थी।
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इसी दौरान उन्हें जंगल में संदिग्ध विस्फोटक उपकरण दिखाई दिए।
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जांच करने पर पता चला कि उनमें से दो बम बीयर की खाली कांच की बोतलों में भरे गए थे।
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टीम ने तुरंत एरिया को सील किया और बम निरोधक दस्ते ने मौके पर उन्हें डिफ्यूज़ कर दिया।
पुलिस के अनुसार, यह इलाका पहले से ही संवेदनशील रहा है। कुछ महीने पहले इसी जगह एक DRG जवान शहीद हुआ था और तीन घायल हुए थे।
क्यों खतरनाक हैं कांच की बोतल वाले IED?
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि माओवादी अब आसानी से उपलब्ध चीज़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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आसान उपलब्धता: बीयर की बोतलें खुलेआम मिलती हैं, इन्हें खरीदना या जुटाना कठिन नहीं।
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छुपाना आसान: कांच की पारदर्शी बोतलों में विस्फोटक पैक करना और झाड़ियों में छुपाना बहुत सरल है।
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घातक असर: विस्फोट के समय बोतल चटककर दर्जनों नुकीले कांच के टुकड़ों में बदल जाती है।
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गंभीर चोटें: ये टुकड़े शरीर में गहराई तक घुस सकते हैं, जिससे तेज़ खून बहना और आंतरिक चोटें हो सकती हैं।
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रासायनिक जलन: विस्फोटक पदार्थ के साथ कांच के टुकड़े और भी खतरनाक हो जाते हैं, जो सैनिकों को लड़ने की स्थिति से बाहर कर सकते हैं।
एक सीआरपीएफ अधिकारी के मुताबिक, “माओवादी जानते हैं कि यदि एक भी जवान घायल हो जाए तो पूरी टीम का ध्यान तुरंत उसकी निकासी और मेडिकल सुविधा पर चला जाता है। उस मौके का फायदा उठाकर वे हमला कर सकते हैं।”
पहले भी सामने आ चुके ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब ‘बोतल IED’ बरामद किए गए हों।
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सुकमा और बीजापुर जिलों में भी पहले ऐसे विस्फोटक बरामद हो चुके हैं।
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अधिकारियों के अनुसार, अबूझमाड़ और इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान माओवादियों के मजबूत गढ़ हैं।
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यहां आए दिन घात लगाकर हमले और IED बरामदगी होती रहती है।
सुरक्षाबलों के लिए नई चुनौती
IED का इस्तेमाल माओवादियों की पुरानी रणनीति रही है, लेकिन अब बोतलों का प्रयोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती है।
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लो- कॉस्ट मटेरियल
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आसानी से उपलब्ध साधन
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ढूंढने में कठिनाई
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नुकसान की संभावना ज्यादा
पुलिस अफसरों का कहना है कि यह “रोज़मर्रा की चीज़ों का खतरनाक इनोवेशन” है, जिसका सीधा निशाना सिर्फ सुरक्षा बल हैं, आम जनता नहीं।
पुलिस की अपील
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ग्रामीण और स्थानीय लोग किसी भी संदिग्ध बोतल, डिब्बा, बैग या तार को छूने की कोशिश न करें।
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तुरंत नज़दीकी पुलिस या सुरक्षा बल को सूचना दें।
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छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान दें — यह ज़िंदगी बचा सकते हैं।
📌 निष्कर्ष:
माओवादी हर बार सुरक्षा बलों के खिलाफ नई चालें चल रहे हैं। अब कांच की बोतलें उनके लिए नया हथियार बन गई हैं। यह न सिर्फ सस्ते और आसानी से मिलने वाले हैं, बल्कि घातक भी साबित हो सकते हैं। आने वाले समय में ऐसे IED से निपटना सुरक्षाबलों के लिए और बड़ी चुनौती बनने वाला है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

