“2 सेकंड और रुकते तो मलबे में दब जाते” – धराली आपदा में व्यवसायी भूपेंद्र की आपबीती

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🌪️ धराली आपदा: ‘दो सेकंड रुकते तो मलबे में दफन हो जाते’, होटल व्यवसायी भूपेंद्र पंवार की आपबीती ने सबको किया भावुक

होम स्टे का सपना चकनाचूर, अब दूसरों के कपड़ों में जिंदा रहने की जद्दोजहद

उत्तरकाशी, धराली (उत्तराखंड):
5 अगस्त 2025 की दोपहर उत्तराखंड के धराली गांव में जो हुआ, वह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि सैकड़ों परिवारों के सपनों, मेहनत और उम्मीदों पर आई आपदा थी। धराली के रहने वाले होटल व्यवसायी भूपेंद्र पंवार उन्हीं पीड़ितों में से एक हैं, जिनका सब कुछ इस आपदा में तबाह हो गया।

🏚️ सपनों का घर बना मलबे का ढेर

भूपेंद्र पंवार ने अप्रैल में अपनी पूरी जीवन भर की कमाई लगाकर दो मंजिला होम स्टे बनवाया था। चारधाम यात्रा से ठीक पहले तैयार हुआ यह होम स्टे सेब के बागानों के बीच स्थित था। वह इसे लेकर काफी आशान्वित थे कि अब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो जाएगी। लेकिन उन्हें क्या पता था कि महज 5 महीने बाद सब कुछ मलबे में मिल जाएगा।

“वो सिर्फ एक सपना नहीं था, मेरी पूरी जिंदगी की मेहनत थी।”

🏃‍♂️ मौत से दो सेकंड का फासला

आपदा के दिन भूपेंद्र अपने होटल के बाहर कुछ ग्रामीणों के साथ खड़े थे। तभी मुखबा गांव की ओर से सीटियों की आवाज और ‘भागो-भागो’ की चीखें सुनाई दीं। भूपेंद्र और चार अन्य लोग बिना समय गंवाए हर्षिल की ओर दौड़ पड़े। उनके पीछे एक कार चालक भी तेजी से दौड़ रहा था।

“अगर दो-तीन सेकंड भी देर हो जाती, तो आज ये कहानी कोई और सुना रहा होता।”

📞 “मैं सुरक्षित हूं, लेकिन सब कुछ खत्म हो गया”

भागकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद भूपेंद्र ने सबसे पहले अपनी पत्नी और बच्चों को फोन किया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा—

“मैं ठीक हूं… लेकिन सब कुछ चला गया…”
फोन कट गया और नेटवर्क भी चला गया।

उस पल से उन्होंने खुद को बिल्कुल अकेला और असहाय महसूस किया।

👕 कपड़े तक मांगने पड़े, लगा जैसे गांव पर बोझ हूं

आपदा के तीसरे दिन गांव के लोगों ने भूपेंद्र को खाना खिलाया और पहनने के लिए कपड़े दिए। मलबे में दबे उनके कपड़े अब केवल याद बनकर रह गए। टी-शर्ट और पजामा मांगकर पहनना पड़ा।

“अपनों के बीच भी खुद को बोझ महसूस करना, सबसे बड़ी त्रासदी है।”

🚁 रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी मशीनें और हेलिकॉप्टर

उत्तरकाशी जिले के धराली, हर्षिल, मुखबा, नेलांग जैसे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से राहत और बचाव कार्य चल रहा है। शुक्रवार को:

  • चार यूकाडा हेलिकॉप्टरों ने मातली से हर्षिल के लिए उड़ान भरी

  • चिनूक और MI-17 सहित आठ हेलिकॉप्टर बचाव कार्य में लगे हैं

  • 657 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है

  • गुरुवार को वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से भारी मशीनरी पहुंचाई गई

💔 धरती की मार, इंसानियत की जीत

भूपेंद्र जैसे कई लोग इस आपदा में सब कुछ गंवा चुके हैं – लेकिन हार नहीं मानी है। गांववालों की मदद, प्रशासन का प्रयास और सेना का सहयोग उन्हें दोबारा खड़े होने की उम्मीद दे रहा है।

“सब कुछ गया है, लेकिन जिंदा हूं… और जब तक सांस है, फिर से शुरू करूंगा।”


📌 यह रिपोर्ट भारत क्रांति न्यूज की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग का हिस्सा है। अगर आप मदद करना चाहते हैं या किसी को सहायता की आवश्यकता है, तो हमसे संपर्क करें:

🖋️ रिपोर्ट: [आशु झा ], भारत क्रांति न्यूज |

Bharat Kranti News
Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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