भारत-अमेरिका के 25 साल पुराने रिश्तों पर मंडराया खतरा! डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से बिगड़ सकता है संतुलन, पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने दी चेतावनी
By Bharat Kranti News
सारांश
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विवादित नीतियों और बयानबाज़ी के चलते भारत-अमेरिका के 25 वर्षों में विकसित हुए रिश्तों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका के वरिष्ठ पूर्व अधिकारी इवान ए. फिगेनबॉम ने चेतावनी दी है कि ट्रंप के टैरिफ युद्ध, रूसी तेल पर प्रतिबंध, और सार्वजनिक आलोचनाएं दोनों देशों के बीच दशकों की मेहनत से बने भरोसे को खत्म कर सकती हैं।
पृष्ठभूमि:
भारत और अमेरिका के रिश्ते वर्ष 2000 के बाद लगातार मज़बूत होते चले गए — चाहे वह परमाणु समझौता हो, रक्षा सहयोग, रणनीतिक भागीदारी या फिर क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों पर एकजुटता।
लेकिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इन संबंधों में कई बार तनाव देखने को मिला। अब 2025 के चुनावी माहौल में ट्रंप एक बार फिर अमेरिकी राजनीति में सक्रिय हो चुके हैं, और उनके बयानों से भारत में बेचैनी का माहौल बन गया है।
ट्रंप की हालिया कार्रवाई और भारत पर प्रभाव:
25% बेसलाइन टैरिफ की घोषणा:
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए भारत के खिलाफ 25% बेसलाइन टैरिफ की बात कही। यह निर्णय ऐसे समय में आया जब दोनों देश व्यापार वार्ता में थे। इसी दौरान ट्रंप प्रशासन ने चीन को टैरिफ में राहत दी — जिससे भारत के प्रति भेदभाव का संकेत मिला।
रूसी तेल पर सेकेंडरी प्रतिबंध की चेतावनी:
भारत द्वारा रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदने को लेकर ट्रंप ने भारत पर ‘सेकेंडरी प्रतिबंध’ लगाने की चेतावनी दी है। इसे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति में सीधा हस्तक्षेप माना जा रहा है।
भारत को ‘Dead Economy’ कहना:
ट्रंप ने एक रैली में भारत को “Dead Economy” कहकर संबोधित किया — जिसे भारत में अपमानजनक और गैर-राजनयिक बयान माना गया है।
पूर्व अमेरिकी सहायक मंत्री की गहन चेतावनी
इवान ए. फिगेनबॉम, जिन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल में अमेरिकी उप-सहायक विदेश मंत्री के रूप में काम किया था, ने कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में प्रकाशित लेख में चेतावनी दी है कि ट्रंप की रणनीतियां भारत-अमेरिका संबंधों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। उन्होंने 5 ऐसे बिंदुओं की पहचान की जो अब खतरे में हैं:
भारत-अमेरिका संबंधों के 5 नाजुक बिंदु:
अमेरिका द्वारा ‘स्ट्रेटेजिक रिस्क’ लेने से इनकार
नई दिल्ली हमेशा यह मानती रही कि अमेरिका भारत के साथ रणनीतिक संबंधों के लिए जोखिम उठाएगा — लेकिन ट्रंप ने इसके विपरीत रुख दिखाया।
पाकिस्तान को लेकर दोहरा रवैया
जहां पहले अमेरिका भारत की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देता था, ट्रंप ने पाकिस्तान की तारीफ की और वहां की सेना के साथ समझौते किए। यह सब कुछ पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद हुआ — जिसने नई दिल्ली की चिंता बढ़ा दी।
तीसरे पक्षों के साथ भरोसे का संकट
भारत-रूस तेल व्यापार पर प्रतिबंध की धमकी से अमेरिका ने यह जता दिया कि वह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को स्वीकार नहीं करता। यह अमेरिका की ‘इंडो-पैसिफिक रणनीति’ के भी खिलाफ है।
राजनयिक भाषा का अभाव
जहां अब तक दोनों पक्षों ने सार्वजनिक तौर पर संयमित भाषा का प्रयोग किया था, ट्रंप ने भारत को “Dead Economy” और “unfair” कहकर पारंपरिक मर्यादाएं तोड़ दीं।
राजनीतिक समर्थन का विघटन
2005 में कांग्रेस पार्टी ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते का नेतृत्व किया था। आज वही कांग्रेस भारत-अमेरिका संबंधों की सबसे बड़ी आलोचक बन गई है। दूसरी ओर, अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी, जो पारंपरिक रूप से भारत समर्थक थी, अब ट्रंप के नेतृत्व में भारत के विरोध में बयानबाज़ी कर रही है।
भारत का जवाब – आत्मनिर्भर और अडिग:
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में कहा —
“भारत के लिए किसानों और देश का हित सर्वोच्च है। कोई भी बाहरी दबाव हमारी नीतियों को प्रभावित नहीं कर सकता।”
भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने फैसले संप्रभुता के आधार पर करेगी, ना कि अमेरिकी दबाव के अधीन।
क्या भविष्य में संबंध सुधर सकते हैं?
राजनयिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ट्रंप फिर से राष्ट्रपति बने, तो भारत-अमेरिका रिश्ते और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए दोनों देशों को चाहिए कि वे अपने दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए संवाद और सहयोग को बनाए रखें।
निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ रणनीति, अपमानजनक बयान और रूसी तेल पर प्रतिबंध की धमकी भारत-अमेरिका के दशकों पुराने रिश्तों को कमजोर कर सकते हैं। पूर्व राजनयिकों और विशेषज्ञों की चेतावनी को नज़रअंदाज़ करना भारत और अमेरिका — दोनों के लिए भारी पड़ सकता है।
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Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.
