भदोही: बीमा कंपनी पर जुर्माना—उपभोक्ता अधिकारों की जीत, आयोग का सख्त संदेश
ज्ञानपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में अहम माना जा रहा है। आयोग ने इलाज खर्च का वैध क्लेम अस्वीकार करने को सेवा में कमी करार देते हुए आदित्य बिरला कैपिटल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर न सिर्फ आर्थिक दंड लगाया, बल्कि ब्याज सहित भुगतान का स्पष्ट और समयबद्ध आदेश भी दिया।
क्या रहा मामला
परिवादिनी शालिनी मिश्रा ने आयोग के समक्ष बताया कि उनकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के अंतर्गत इलाज पर हुआ खर्च कंपनी ने बिना ठोस कारण के खारिज कर दिया। इससे उन्हें इलाज के बाद आर्थिक दबाव और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। आयोग में प्रस्तुत दस्तावेजों और सुनवाई के दौरान दिए गए तर्कों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि क्लेम अस्वीकार करने का निर्णय अनुचित था।
आयोग की प्रमुख टिप्पणियां
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क्लेम अस्वीकार करना सेवा में कमी के अंतर्गत आता है।
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उपभोक्ता को उसके वैध अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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बीमा कंपनियों को पारदर्शिता और समयबद्धता का पालन करना होगा।
आदेश के मुख्य बिंदु
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इलाज खर्च की प्रतिपूर्ति: ₹1,72,685
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जुर्माना: ₹15,000
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ब्याज: 6% वार्षिक साधारण ब्याज (12 नवंबर 2024 से 13 फरवरी 2026 तक)
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अनुपालन न होने पर: 12% वार्षिक ब्याज की दर से संपूर्ण राशि का भुगतान
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भुगतान की समयसीमा: दो माह
उपभोक्ताओं के लिए सीख
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पॉलिसी दस्तावेज और इलाज से जुड़े सभी बिल/रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
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क्लेम अस्वीकार होने पर लिखित कारण मांगें।
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असंतोष की स्थिति में जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल करना प्रभावी उपाय है।
आगे की प्रक्रिया
आयोग के आदेश के अनुपालन की निगरानी की जाएगी। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होता, तो दंडात्मक ब्याज स्वतः लागू होगा। मामले की जानकारी आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने दी।
यह फैसला बीमा कंपनियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि उपभोक्ता हितों की अनदेखी महंगी पड़ सकती है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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