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श्रम सुधार बिल के विरोध में ट्रेड यूनियनों का जोरदार प्रदर्शन, भदोही में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मिला-जुला असर
भदोही।
केंद्र सरकार की नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में गुरुवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का भदोही जनपद में मिला-जुला असर देखने को मिला। विभिन्न किसान संगठनों और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मजदूरों ने शहर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया और तहसील परिसर पहुंचकर धरना दिया।
हड़ताल का आह्वान संयुक्त किसान मोर्चा समेत देश की प्रमुख ट्रेड यूनियनों द्वारा किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने भारत-अमेरिका समझौते, निजीकरण की नीतियों, महंगाई, बेरोजगारी तथा नए श्रम सुधार कानूनों को मजदूर विरोधी बताते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
तहसील परिसर में दिया धरना, सौंपा ज्ञापन
जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए तहसील पहुंचा, जहां मजदूर संगठनों के पदाधिकारियों ने धरना दिया। वक्ताओं ने कहा कि नए श्रम कानूनों से श्रमिकों की सुरक्षा कमजोर होगी और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
धरना समाप्ति के बाद प्रशासन को मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा गया।
बैंकों व बीमा कार्यालयों पर दिखा असर
हड़ताल का असर बैंकिंग क्षेत्र में आंशिक रूप से देखने को मिला।
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निजी बैंकों में सामान्य रूप से कार्य होता रहा।
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राष्ट्रीयकृत बैंकों में कुछ समय के लिए शटर बंद किए गए।
हालांकि बैंक अधिकारियों ने बताया कि अधिकारियों की हड़ताल में भागीदारी न होने के कारण लेन-देन की प्रक्रिया पूरी तरह ठप नहीं हुई।
मजदूर संगठनों ने दावा किया कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) कार्यालयों में भी कामकाज प्रभावित हुआ और कर्मचारियों ने कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रमुख संगठनों की रही भागीदारी
भदोही में आंदोलन की अगुवाई हिंद मजदूर किसान पंचायत, उप्र किसान सभा, अग्रगामी किसान सभा, खेत मजदूर सभा, किसान महासभा तथा उप्र उत्तराखंड मेडिकल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ने की। सैकड़ों मजदूरों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर रैली में हिस्सा लिया।
स्टेशन रोड बना प्रदर्शन का केंद्र
हड़ताल के दौरान भदोही नगर के स्टेशन रोड क्षेत्र में काफी चहल-पहल रही। ट्रेड यूनियन नेताओं के नेतृत्व में राष्ट्रीयकृत बैंकों और एलआईसी कार्यालय के बाहर कर्मचारियों ने नारेबाजी की और सरकार से मजदूर हितों की रक्षा करने की मांग की।
यह हैं प्रमुख मांगें
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नए श्रम कानूनों को वापस लिया जाए
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महंगाई पर नियंत्रण किया जाए
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निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगे
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श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
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ठेका प्रथा समाप्त की जाए
ट्रेड यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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