ज्ञानपुर। पटेल नगर स्थित एक लॉन में बिना अनुमति इलाज कर रहे यूनानी डॉक्टर को पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अचानक ठंडी पड़ने का मामला अब और गहराता जा रहा है। पूरे घटनाक्रम में विभागीय कार्यप्रणाली और संभावित दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि पटेल नगर स्थित एक निजी लॉन में बाहरी जिले से आया एक डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहा है। सूचना पर नायब तहसीलदार जयराम, एसीएमओ डॉ. ओपी शुक्ला और अन्य अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। वहां मुरादाबाद निवासी डॉ. मोहम्मद सद्दाम दर्जनों मरीजों को पुड़िया में दवाइयां बांटते मिले।
स्थानीय लोगों ने बताया कि उक्त डॉक्टर पिछले करीब सात महीनों से नियमित रूप से इस लॉन में बैठकर इलाज कर रहा था। साइटिका, घुटने का दर्द, कमर दर्द सहित अन्य पुरानी बीमारियों के मरीज दूर-दूर से यहां पहुंचते थे। कई मरीजों ने यह भी बताया कि उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि दवाइयों से बिना ऑपरेशन और बिना ज्यादा खर्च के आराम मिल जाएगा।
जांच के दौरान टीम ने जब डॉक्टर से इलाज से संबंधित अनुमति और शैक्षणिक प्रमाण पत्र मांगे तो वह मौके पर कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। इसके बाद टीम उन्हें कोतवाली ज्ञानपुर लेकर पहुंची। यहां पूछताछ के दौरान डॉक्टर ने अपनी डिग्री प्रस्तुत की, जो होमियोपैथी से संबंधित बताई गई। इसके बाद आयुर्वेद अधिकारी डॉ. नित्यानंद को भी जांच के लिए बुलाया गया।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह बात स्पष्ट हुई कि डॉक्टर यूनानी पद्धति से इलाज कर रहे थे, जबकि उनकी डिग्री होमियोपैथी की है। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से इलाज की कोई पूर्व अनुमति भी नहीं ली थी। विभागीय नियमों के अनुसार, किसी भी पद्धति से इलाज करने के लिए संबंधित विभाग को पूर्व सूचना और अनुमति देना अनिवार्य है।
करीब 45 मिनट तक कोतवाली में जांच चलती रही। कभी अधिकारी अंदर जाते दिखे तो कभी बाहर आकर आपस में चर्चा करते रहे। इसी दौरान अचानक एक फोन कॉल आया और उसके बाद माहौल बदल गया। कुछ ही देर में डॉक्टर को बिना किसी लिखित कार्रवाई, नोटिस या चालान के छोड़ दिया गया।
फोन कॉल किसका था और किस स्तर से दबाव आया, इसे लेकर अधिकारी कुछ भी कहने से बचते नजर आए। जब इस संबंध में सवाल किए गए तो केवल इतना कहा गया कि “मामले की जांच की गई है।”
इस पूरे प्रकरण को लेकर स्थानीय लोगों और मरीजों में आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर बिना अनुमति और गलत पद्धति से इलाज करना अपराध है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अगर ऐसे मामलों में फोन कॉल के बाद कार्रवाई रुक जाएगी, तो अवैध तरीके से इलाज करने वालों के हौसले और बढ़ेंगे।
फिलहाल मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर वह फोन कॉल किसका था, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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