भदोही से वाराणसी–प्रयागराज के लिए नहीं शुरू हो सकी बस सेवा, लोग रेलवे पर आश्रित
भदोही।
भदोही नगर में राजकीय बस स्टैंड का निर्माण होने के बावजूद वाराणसी और प्रयागराज के लिए आज तक नियमित बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते हजारों यात्रियों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और लोग मजबूरी में रेलवे अथवा निजी साधनों पर निर्भर हैं।
वाराणसी और प्रयागराज शिक्षा, व्यापार और रोजगार के बड़े केंद्र हैं। दुर्गागंज, सुरियावां, मोढ़, भदोही और चौरी क्षेत्र से प्रतिदिन बड़ी संख्या में व्यापारी, छात्र और कर्मचारी वाराणसी आते-जाते हैं। लेकिन सीधी बस सेवा न होने से यात्रियों को या तो ट्रेन का सहारा लेना पड़ता है या फिर अव्यवस्थित निजी साधनों से सफर करना पड़ता है।
प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को निजी बसों में सफर करना पड़ता है, जबकि वाराणसी जाने वालों के लिए ट्रेन ही एकमात्र विकल्प बचता है। यात्रियों का आरोप है कि जीप में निर्धारित आठ यात्रियों की जगह 15 तक सवार कर लिए जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। वहीं निजी बस से वाराणसी पहुंचने में दो से तीन घंटे तक का समय लग जाता है।
यात्री रामराज यादव ददा ने बताया कि भदोही के जमुनीपुर में कई वर्ष पहले राजकीय बस स्टैंड बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन अब तक बसों का संचालन शुरू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि केवल माघ मेला या प्रयागराज में किसी विशेष आयोजन के समय ही कुछ दिनों के लिए बसें चलाई जाती हैं, उसके बाद फिर बंद कर दी जाती हैं।
इस संबंध में परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक परशुराम पांडेय ने बताया कि भदोही से मिर्जापुर और जौनपुर के लिए बसें संचालित की जा रही हैं। वहीं प्रयागराज और वाराणसी के लिए बसें औराई से चलाई जाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भदोही से काशी और प्रयागराज के लिए नियमित बस सेवा शुरू की जाए, तो आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती है और रेलवे पर निर्भरता भी कम होगी।
बस सेवा न होने से छात्र, व्यापारी और कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित
भदोही से वाराणसी और प्रयागराज की दूरी कम होने के बावजूद सीधी बस सेवा न मिलने से सबसे अधिक असर छात्रों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है। वाराणसी में पढ़ने वाले छात्र रोज़ाना अप-डाउन करते हैं, जबकि कपड़ा कारोबार से जुड़े सैकड़ों व्यापारी भदोही से काशी मंडी आते-जाते हैं। बस सुविधा न होने के कारण उन्हें या तो महंगी ट्रेन पकड़नी पड़ती है या फिर असुरक्षित निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
निजी वाहनों में मनमानी, किराया और जोखिम दोनों ज्यादा
यात्रियों का कहना है कि निजी जीप और टेंपो में क्षमता से दोगुने यात्री बैठा दिए जाते हैं। इससे न सिर्फ दुर्घटना का खतरा रहता है बल्कि किराया भी मनमाने ढंग से वसूला जाता है। कई बार यात्रियों को बीच रास्ते में उतार दिया जाता है या लंबे रूट से घुमाकर ले जाया जाता है।
राजकीय बस स्टैंड बना, लेकिन उपयोग शून्य
जमुनीपुर में बना राजकीय बस स्टैंड करोड़ों की लागत से तैयार किया गया, लेकिन आज भी वहां सन्नाटा पसरा रहता है। न तो नियमित बसें खड़ी होती हैं और न ही यात्रियों के लिए कोई सुविधा उपलब्ध है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड के रखरखाव पर सरकारी धन खर्च हो रहा है, लेकिन जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा।
विशेष आयोजनों में ही चलती हैं बसें
प्रयागराज में माघ मेला, कुंभ या किसी बड़े आयोजन के दौरान कुछ दिनों के लिए भदोही से बसें चलाई जाती हैं। आयोजन खत्म होते ही बस सेवा फिर बंद कर दी जाती है। यात्रियों का सवाल है कि जब विशेष अवसरों पर बसें चल सकती हैं, तो फिर नियमित सेवा क्यों नहीं शुरू की जा रही।
जनता की मांग: भदोही से सीधे काशी–प्रयागराज बस सेवा शुरू हो
स्थानीय नागरिकों, व्यापार मंडलों और छात्र संगठनों ने मांग की है कि
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भदोही से वाराणसी और प्रयागराज के लिए नियमित रोडवेज बस सेवा शुरू की जाए
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सुबह और शाम के समय विशेष बसें चलाई जाएं
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जमुनीपुर बस स्टैंड को पूर्ण रूप से संचालित किया जाए
लोगों का कहना है कि यदि बस सेवा शुरू होती है तो न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि भदोही का आर्थिक और शैक्षणिक संपर्क भी मजबूत होगा।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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