पुलिस के सामने बड़ी चुनौती, परिजनों की बढ़ी चिंता
ज्ञानपुर (भदोही)।
कालीन नगरी भदोही में सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए चिंता और भय का कारण बनता जा रहा है। बीते 10 महीनों में कुल 360 लड़कियां (141 किशोरियां व 219 युवतियां) घर छोड़कर चली गईं। इनमें अधिकांश मामले मोबाइल फोन और सोशल मीडिया पर बने संबंधों से जुड़े पाए गए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि लड़कियां पहले फोन पर बातचीत करती हैं, फिर फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर संपर्क बढ़ता है। धीरे-धीरे भावनात्मक जुड़ाव इतना गहरा हो जाता है कि वे परिवार और समाज से रिश्ता तोड़कर अंजान युवकों के साथ निकल पड़ती हैं।
आंकड़ों की जुबानी बढ़ता खतरा
(1 अप्रैल 2025 – 31 जनवरी 2026)
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लापता किशोरियां: 141
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बरामद: 128
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अब भी लापता: 13
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लापता युवतियां: 219
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अब भी तलाश जारी: 38
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कुल लापता लड़कियां: 360
साल 2024 में यह संख्या 290 थी, जबकि 2025 में यह डेढ़ गुना बढ़कर 360 तक पहुंच गई।
हर थाने में बनी विशेष टीमें
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले के हर थाने में दो-दो विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो रोजाना लापता किशोरियों और युवतियों की तलाश में जुटी रहती हैं। पुलिस मोबाइल लोकेशन, सोशल मीडिया अकाउंट, कॉल डिटेल और संभावित ठिकानों की गहन जांच कर रही है।
परिजनों की मजबूरी, बनी बड़ी भूल
अधिकांश मामलों में परिजनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने
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पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन दिया
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लेकिन उसकी निगरानी नहीं की
इसी का फायदा उठाकर लड़कियां अंजान लोगों से जुड़ गईं। कई मामलों में परिजनों को तब जानकारी मिली, जब लड़की घर से गायब हो चुकी थी।
हालिया घटनाएं बढ़ा रहीं चिंता
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गोपीगंज के एक गांव से दो चचेरी बहनें एक साथ लापता
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एक अमेठी से बरामद
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दूसरी की तलाश जारी
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बीते एक सप्ताह में
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सुरियावां
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औराई
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भदोही
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गोपीगंज
इन क्षेत्रों से करीब 7 किशोरियां घर छोड़कर चली गईं।
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पुलिस अधीक्षक का सख्त संदेश
एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने कहा—
“मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रयोग से ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। पुलिस पूरी गंभीरता से काम कर रही है। अधिकांश किशोरियों को सकुशल बरामद कर लिया गया है। जो शेष हैं, उनकी तलाश तेज कर दी गई है।”
विशेषज्ञ की चेतावनी
मनोचिकित्सक अभिनव पांडेय का मानना है—
“लड़कियां भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील होती हैं। सोशल मीडिया पर दिखने वाली दुनिया वास्तविक नहीं होती। परिवार को चाहिए कि वे बच्चों से संवाद करें, न कि सिर्फ पाबंदियां लगाएं। रोक-टोक के बजाय समझाना ज्यादा जरूरी है।”
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

