10 साल में करोड़ों के इलाज का बोझ, एक्स-रे के अभाव में मरीज निजी केंद्रों पर जाने को मजबूर
सीएचसी सुरियावां में एक्स-रे सुविधा न होने का सीधा असर गरीब और ग्रामीण मरीजों पर पड़ रहा है। हड्डी टूटने, सड़क दुर्घटना, टीबी, फेफड़े की बीमारी और गंभीर चोटों के मामलों में डॉक्टरों को एक्स-रे की सलाह देनी पड़ती है, लेकिन सुविधा न होने से मरीजों को ज्ञानपुर, जौनपुर या निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी केंद्रों पर एक्स-रे कराने में 300 से 800 रुपये तक खर्च हो जाता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बड़ी समस्या है। कई बार पैसे के अभाव में मरीज जांच ही नहीं करा पाते, जिससे इलाज में देरी होती है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, 10 साल पहले जो मैनुअल एक्स-रे मशीन लगाई गई थी, वह तकनीकी रूप से पुरानी हो चुकी है। समय पर इंस्टॉलेशन और रखरखाव न होने से मशीन पूरी तरह अनुपयोगी हो गई। मशीन लगाने में खर्च हुए 10 लाख रुपये अब व्यर्थ साबित हो रहे हैं, जो सरकारी धन के दुरुपयोग का भी सवाल खड़ा करता है।
छह महीने पहले कर्नाटक से आई इंजीनियरों की टीम द्वारा मशीन चालू न कर पाने के बाद विभाग ने इसे सुधारने की उम्मीद लगभग छोड़ दी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने नई डिजिटल एक्स-रे मशीन की मांग शासन को भेजी, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जौनपुर सीमा से सटे इस सीएचसी पर दूर-दराज के गांवों के मरीज निर्भर हैं, ऐसे में बुनियादी जांच सुविधा का न होना स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
अब देखना यह है कि शासन स्तर से डिजिटल एक्स-रे मशीन की मांग कब तक स्वीकृत होती है और सुरियावां सीएचसी के मरीजों को यह जरूरी सुविधा कब नसीब होती है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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