औराई में 77 अति कुपोषित बच्चे, एक भी एनआरसी नहीं भेजा गया
ज्ञानपुर। जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रहे अभियानों की समीक्षा के दौरान औराई ब्लॉक की लापरवाही सामने आई है। शुक्रवार को विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) बाल गोविंद शुक्ल की अध्यक्षता में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में अति कुपोषित (सैम) बच्चों के उपचार और पोषण प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया।
समीक्षा में बताया गया कि जिले में अति कुपोषित बच्चों की कुल संख्या 395 है, जो पिछले महीनों की तुलना में कम है। हालांकि, जिला अस्पताल ज्ञानपुर स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में 10 बेड की क्षमता के सापेक्ष मात्र चार बच्चे ही भर्ती पाए गए। इस पर सीडीओ ने गहरी नाराजगी जताई।
सीडीओ ने निर्देश दिए कि प्रत्येक ब्लॉक से हर माह कम से कम दो अति कुपोषित बच्चों को एनआरसी भेजा जाए। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि औराई ब्लॉक में 77 अति कुपोषित बच्चे चिन्हित होने के बावजूद एक भी बच्चे को एनआरसी नहीं भेजा गया। इस गंभीर लापरवाही पर सीडीओ ने औराई के स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
उन्होंने औराई ब्लॉक की टीम को निर्देशित किया कि अभिभावकों से सीधे संपर्क कर उन्हें बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास के लिए एनआरसी भेजने हेतु प्रेरित किया जाए। सीडीओ ने स्पष्ट कहा कि कुपोषण उन्मूलन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय बढ़ाने, फील्ड स्तर पर निगरानी मजबूत करने और समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
एनआरसी की स्थिति पर उठे सवाल
समीक्षा बैठक में सामने आया कि जिला अस्पताल ज्ञानपुर स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद अपेक्षित संख्या में बच्चों को भर्ती नहीं कराया जा रहा है। 10 बेड की क्षमता वाले केंद्र में केवल चार बच्चों की मौजूदगी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीडीओ ने स्पष्ट किया कि एनआरसी का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अति कुपोषित बच्चों को जीवन रक्षक पोषण और उपचार उपलब्ध कराना है।
अभिभावकों की काउंसलिंग पर जोर
सीडीओ बाल गोविंद शुक्ल ने कहा कि कई मामलों में अभिभावक जानकारी के अभाव या भ्रांतियों के कारण बच्चों को एनआरसी भेजने से हिचकिचाते हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे घर-घर जाकर काउंसलिंग करें और एनआरसी में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दें।
लापरवाही पर सख्त रुख
औराई ब्लॉक में 77 अति कुपोषित बच्चों के बावजूद एक भी बच्चे को एनआरसी न भेजे जाने को सीडीओ ने गंभीर प्रशासनिक चूक बताया। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि भविष्य में भी प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कुपोषण उन्मूलन को लेकर शासन की प्राथमिकता
सीडीओ ने बैठक में कहा कि कुपोषण उन्मूलन केंद्र और राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए विभागों के बीच समन्वय, नियमित मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर ईमानदार प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक माह प्रगति की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
- हर ब्लॉक से न्यूनतम दो अति कुपोषित बच्चों को प्रतिमाह एनआरसी भेजना अनिवार्य
- फील्ड स्तर पर बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग
- अभिभावकों की काउंसलिंग और फॉलोअप
- प्रगति रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर जवाबदेही तय करना
प्रशासन की इस सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अति कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण प्रबंधन में तेजी आएगी और लापरवाह तंत्र में सुधार होगा।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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