करवा चौथ 2026: काशी में शाम 7:57 बजे होगा चंद्रोदय, 14 घंटे 57 मिनट का रहेगा व्रत

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करवा चौथ 2026: काशी में शाम 7:57 बजे होगा चंद्रोदय, 14 घंटे 57 मिनट का रहेगा व्रत

वाराणसी। अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और दांपत्य सुख की कामना के साथ सुहागिन महिलाएं बृहस्पतिवार को करवा चौथ का निर्जला व्रत रखेंगी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार काशी में पिछले वर्ष की तुलना में छह मिनट पहले चंद्रोदय होगा। चंद्रमा के दर्शन शाम 7:57 बजे होने की संभावना है।

मौसम खराब होने पर रात 8:10 बजे तक कर सकती हैं व्रत का पारण

बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. सुभाष पांडेय के अनुसार, यदि मौसम खराब होने या आसमान में बादल छाए रहने के कारण रात आठ बजे तक चंद्रमा के दर्शन नहीं होते हैं, तो महिलाएं रात 8:10 बजे तक व्रत खोल सकती हैं। इस बार चंद्रोदय का निर्धारित समय पिछले वर्ष की तुलना में छह मिनट पहले है। पिछले साल काशी में रात 8:03 बजे चंद्रमा के दर्शन हुए थे, जबकि इस वर्ष शाम 7:57 बजे चंद्रोदय का अनुमान है।

बीएचयू ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय के मुताबिक, मौसम में सक्रिय अर्नब चक्रवात का चंद्रोदय के निर्धारित समय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि, वास्तविक चंद्र दर्शन स्थानीय मौसम और आसमान की स्थिति पर निर्भर करेंगे।

भद्रा से मुक्त रहेगा करवा चौथ का पर्व

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष करवा चौथ पर भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि भद्रा बुधवार शाम 5:31 बजे शुरू हुई और बृहस्पतिवार भोर 4:27 बजे समाप्त हो जाएगी। ऐसे में व्रत वाले दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा।

इस अवसर पर वरीयान योग, परिघ योग, पंच महापुरुष योग, बुधादित्य योग, पाराशरी राजयोग, मालव्य पंच, सरस्वती योग और अखंड सौभाग्य योग सहित कई शुभ योग बनने की बात कही गई है।

सोलह शृंगार कर शिव परिवार की करेंगी पूजा

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार कर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और प्रथम पूज्य भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करेंगी। पूजन में पीली मिट्टी, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, धूप, दीप, पंचामृत और गंगाजल का इस्तेमाल किया जाएगा।

पूजा के दौरान मिट्टी के टोंटीदार करवे, ढक्कन और लोटे का विशेष महत्व रहेगा। महिलाएं हलवा, मिठाई और आठ पूड़ियों की अठावरी का भोग अर्पित करेंगी। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनकर पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।

चंद्रमा को अर्घ्य देकर करेंगी व्रत का पारण

शाम को चंद्रमा के उदित होने पर महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करेंगी और चंद्रदेव को जल का अर्घ्य अर्पित करेंगी। इसके बाद पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से जल ग्रहण कर निर्जला व्रत का पारण करेंगी।

करवा चौथ उत्तर भारत में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में प्रेम व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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