पूर्व कोतवाल पर दर्ज होगा प्रकीर्णवाद, लगेगा जुर्माना
ज्ञानपुर। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मो. शाहनवाज अहमद सिद्दीकी की अदालत ने पुलिस लॉकअप से आरोपी के फरार होने के बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने मुंशी रमेश चंद्र तिवारी को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया, जबकि तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अरूण कुमार दूबे के खिलाफ धारा 250 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत प्रकीर्णवाद दर्ज करने और जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 18 सितंबर 2016 को चोरी के आरोपी वकील बिंद निवासी विजयीपुर को न्यायालयी कार्यवाही के बाद गोपीगंज कोतवाली के लॉकअप में निरुद्ध किया गया था। उसी रात आरोपी लॉकअप की रॉड तोड़कर फरार हो गया।
घटना के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी अरूण कुमार दूबे ने मुंशी रमेश चंद्र तिवारी और होमगार्ड शिवचंद्र पाल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। दोनों कर्मियों को निलंबित भी किया गया था। बाद में पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मुंशी की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई थी और उन पर गलत तरीके से मुकदमा दर्ज कराया गया। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि रमेश चंद्र तिवारी के विरुद्ध दर्ज कराई गई एफआईआर तथ्यात्मक रूप से पुष्ट नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि झूठे अभियोजन के कारण वादी मुकदमा को सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव झेलना पड़ा। ऐसी परिस्थिति में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अरूण कुमार दूबे के विरुद्ध धारा 250 के तहत प्रकीर्णवाद दर्ज कर क्षतिपूर्ति दिलाई जाना न्यायोचित है।
कोर्ट के इस फैसले को पुलिस कार्यप्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय यह संदेश देता है कि बिना ठोस साक्ष्य के अधीनस्थ कर्मियों पर कार्रवाई करने पर जिम्मेदार अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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