परियोजना से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलू
शहर की बढ़ती आबादी के अनुसार योजना
भदोही जिले में कुल सात निकाय हैं, जिनमें भदोही नगर पालिका सबसे बड़ा निकाय है। पहले नगर पालिका क्षेत्र की आबादी लगभग एक लाख थी, लेकिन 28 गांवों को शहरी सीमा में शामिल किए जाने के बाद यह बढ़कर करीब डेढ़ लाख हो गई है। बढ़ती आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के दबाव को देखते हुए तीन एसटीपी की योजना को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर
एसटीपी के संचालन में आने के बाद बिना शोधन के नालों से नदियों में जाने वाला सीवेज पूरी तरह नियंत्रित होगा। इससे नदियों में घुली रसायनिक गंदगी कम होगी, जलजनित बीमारियों पर रोक लगेगी और भूजल स्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका भी घटेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
कालीन उद्योग को मिलेगा दीर्घकालिक लाभ
भदोही का कालीन उद्योग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है। एसटीपी स्थापित होने से उद्योगों पर प्रदूषण को लेकर लगने वाले संभावित प्रतिबंधों से राहत मिलेगी। साथ ही, उद्योगों को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालन में सुविधा होगी, जिससे निर्यात और रोजगार दोनों को स्थिरता मिलेगी।
नदियों के साथ गंगा भी रहेगी सुरक्षित
वरुणा और मोरवा नदियों का पानी आगे चलकर गंगा में मिलता है। ऐसे में भदोही में एसटीपी लगने से गंगा में जाने वाला प्रदूषण भी काफी हद तक रुकेगा। यह कदम गंगा को स्वच्छ रखने के राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूती देगा और पूर्वांचल क्षेत्र में नदी संरक्षण की दिशा में एक उदाहरण बनेगा।
स्थानीय लोगों में उम्मीद
नगर क्षेत्र के लोगों और किसानों को उम्मीद है कि एसटीपी परियोजना से लंबे समय से चली आ रही जल प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा। प्रशासन का दावा है कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा कर लिया जाएगा, ताकि आगामी वर्षों में भदोही को स्वच्छ और सुरक्षित जल व्यवस्था मिल सके।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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