जन्माष्टमी का “चमत्कार”: गंभीर हादसे में घायल 17 वर्षीय कृष्णा सरोज को डॉ. पीयूष जायसवाल ने बचाया
भदोही।
भदोही जिले में जन्माष्टमी का दिन इस बार एक परिवार के लिए डर और दहशत से भरा हुआ था, लेकिन अंत में यह दिन उनके लिए किसी चमत्कार से कम साबित नहीं हुआ। शनिवार को 17 वर्षीय कृष्णा सरोज, जो इस शुभ दिन पर जन्मे थे, गंभीर सड़क हादसे का शिकार हो गए। यह हादसा भदोही-लुंबिनी मार्ग, नेशनल हाईवे के बभनौटी बाजार के पास हुआ, जब कृष्णा बाइक से जा रहे थे और ओवरटेक करते समय सड़क के डिवाइडर से टकरा गए।
टक्कर इतनी भीषण थी कि कृष्णा सड़क पर बुरी तरह घायल होकर गिर पड़े। स्थानीय लोगों ने तत्काल उन्हें पास के चिकित्सालय में भर्ती कराया, जहाँ डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद वाराणसी रेफर कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता है।
परिवार में मातम जैसा माहौल
कृष्णा सरोज के माता-पिता – पूनम और धर्मेंद्र – मूल रूप से भदोही के निवासी हैं लेकिन वर्तमान में गुजरात में रहते हैं। हादसे की सूचना मिलते ही वे तुरंत भदोही पहुंचे।
मां पूनम अपने बेटे की हालत देखकर रो-रोकर बेहाल थीं, वहीं पिता धर्मेंद्र रेलवे काउंटर पर लंबी वेटिंग के बावजूद जल्द से जल्द सफर तय करने की कोशिश में लगे रहे। परिवार का कहना था कि कृष्णा उनका इकलौता बेटा है और इस हादसे ने उनकी जिंदगी थाम दी थी।
वरदान हॉस्पिटल बना जीवनदाता
ऐसे कठिन समय में परिवार को जानकारी मिली कि भदोही के वरदान हॉस्पिटल में डॉ. पीयूष जायसवाल, जो एम्स प्रशिक्षित न्यूरोलॉजिस्ट हैं, 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। परिजन तुरंत कृष्णा को वाराणसी ले जाने के बजाय वरदान हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
डॉ. जायसवाल और उनकी मेडिकल टीम ने तत्काल मरीज का इलाज शुरू किया। आशंका जताई जा रही थी कि वेंटिलेटर के बिना स्थिति संभलना मुश्किल होगा, लेकिन उनकी विशेषज्ञता और त्वरित निर्णय से मरीज की हालत तेजी से सुधरने लगी। कुछ ही समय में कृष्णा होश में आ गए और खतरे से बाहर निकल आए।
डॉक्टर की विशेषज्ञता ने दिलाई राहत
डॉ. पीयूष जायसवाल का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है। उनकी टीम ने पूरा प्रयास किया कि वेंटिलेटर तक की जरूरत न पड़े और मरीज को सामान्य स्थिति में लाया जा सके।
स्थानीय लोगों ने डॉक्टर और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि –
“डॉ. पीयूष जायसवाल सचमुच भदोही का वरदान हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि बड़े हादसों का इलाज अब सिर्फ प्रयागराज या वाराणसी जाकर ही संभव नहीं है।”
परिवार की भावनाएँ
कृष्णा के माता-पिता ने भावुक होकर कहा –
“हमने सोचा था कि हम अपने बेटे को खो देंगे, लेकिन वरदान हॉस्पिटल और डॉ. पीयूष जायसवाल की वजह से आज हमारा बेटा जिंदा है। हमारे लिए यह जन्माष्टमी सच्चा वरदान बन गई।”
जन्माष्टमी पर “चमत्कार”
यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए बल्कि पूरे भदोही जिले के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई है। जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा था, उसी दिन कृष्णा सरोज मौत के मुंह से बाहर निकलकर नई जिंदगी की ओर लौटे।
इस हादसे ने साबित कर दिया कि स्थानीय स्तर पर भी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है और जिले के मरीजों को अब गंभीर हालात में दूसरे बड़े शहरों का चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
निष्कर्ष
जन्माष्टमी का यह दिन कृष्णा सरोज और उनके परिवार के लिए डरावनी याद बन सकता था, लेकिन डॉ. पीयूष जायसवाल की कुशल देखभाल और मानवीय संवेदना ने इसे “जीवनदान” में बदल दिया। इस घटना ने पूरे जिले में यह संदेश दिया कि सही समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज मिलने पर किसी भी बड़े संकट को टाला जा सकता है।
भदोही में अब लोग कहने लगे हैं कि –
“कृष्णा सरोज को जीवनदान देना सिर्फ चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि जन्माष्टमी का सच्चा चमत्कार है।”
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.



