बिना अनुमति पत्रकार अब नहीं कर सकेंगे सरकारी अभिलेखों का निरीक्षण

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सरकारी संस्थानों और विद्यालयों में पत्रकारों की बिना अनुमति प्रवेश पर रोक

सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए सरकारी संस्थानों और विद्यालय परिसरों में पत्रकारों के बिना अनुमति प्रवेश पर रोक लगा दी है। इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी संस्थानों में अनुशासन बनाए रखना, गोपनीयता सुनिश्चित करना और शैक्षणिक व प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बाधाओं को कम करना है।

क्यों उठाया गया यह कदम?

पिछले कुछ समय से सरकारी संस्थानों और विद्यालयों में पत्रकारों के बिना अनुमति प्रवेश की घटनाओं में वृद्धि देखी गई। इसके परिणामस्वरूप कई बार गोपनीय सूचनाओं के लीक होने, संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने और कार्यस्थल पर व्यवधान उत्पन्न होने की शिकायतें दर्ज हुईं।
विशेष रूप से, विद्यालय परिसरों में छात्रों और शिक्षकों की निजता भंग होने की घटनाओं ने प्रशासन को कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

आदेश के मुख्य बिंदु

  1. पूर्व अनुमति अनिवार्य: पत्रकारों को सरकारी संस्थानों और विद्यालयों में प्रवेश से पहले संबंधित विभाग से लिखित अनुमति लेनी होगी।
  2. सख्त निगरानी: सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे।
  3. आवश्यकता आधारित प्रवेश: केवल उन मामलों में अनुमति दी जाएगी, जो संस्थान से सीधे संबंधित हों और जहां मीडिया की उपस्थिति अनिवार्य हो।
  4. आचार संहिता: प्रवेश के दौरान पत्रकारों को संस्थान द्वारा तय की गई आचार संहिता का पालन करना होगा।

पत्रकारों और संगठनों की प्रतिक्रियाएं

इस आदेश के जारी होने के बाद मीडिया जगत में विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

  • समर्थन: कुछ संगठनों का मानना है कि यह कदम सरकारी संस्थानों की सुरक्षा और व्यवस्थित कार्यप्रणाली को बनाए रखने के लिए सही है।
  • विरोध: वहीं, कुछ पत्रकार संगठनों ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता पर अंकुश बताते हुए विरोध जताया है। उनका कहना है कि इससे पत्रकारों के लिए निष्पक्ष रिपोर्टिंग करना मुश्किल हो सकता है।

छात्रों और अभिभावकों की राय

अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और वे बेहतर माहौल में पढ़ाई कर सकेंगे।

क्या होगा आगे?

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आदेश किस प्रकार लागू होता है और इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे। सरकार का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। हालांकि, इस पर संतुलन बनाने की जरूरत होगी ताकि मीडिया की स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहे।

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Bharat Kranti News
Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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