“जंगली जानवरों का आतंक: गोपीगंज में सियार के हमले ने ग्रामीणों को डरा दिया”

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गोपीगंज में जंगली जानवरों का आतंक: प्रशासन की नाकामी और ग्रामीणों की मांग

मुख्य संपादक – शिवशंकर दुबे
edited by : आशु झा 

गोपीगंज: उत्तर प्रदेश के गोपीगंज क्षेत्र में जंगली जानवरों के हमलों ने स्थानीय निवासियों की ज़िंदगी को दांव पर लगा दिया है। हाल ही में हुए एक हादसे ने इस समस्या को और उजागर कर दिया है। सोमवार को, 65 वर्षीय संतोष देवी पर सियार ने हमला कर दिया, जिससे उनकी गंभीर रूप से चोटें आई हैं। इस घटना ने पूरे गांव में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, और अब प्रशासन और वन विभाग की कारगुज़ारी पर सवाल उठने लगे हैं।

घटना का विवरण

संतोष देवी की चोटें इतनी गंभीर थीं कि उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, सियार ने उनका चेहरा और हाथ बुरी तरह से नोच दिया, जिससे उन्हें गहरी जख्में आईं। चिकित्सकों के मुताबिक, देवी की जान बच गई है, लेकिन उनकी स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। इस हमले के बाद, देवी और उनके परिवार ने अपने जीवन के लिए एक नई चिंता को महसूस किया है।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और स्थिति

गोपीगंज के ग्रामीणों का कहना है कि यह हमला एक नये युग की शुरुआत नहीं है। पिछले कुछ महीनों में, सियार और अन्य जंगली जानवरों के हमलों की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि ये जानवर विशेष रूप से रात और सुबह के समय सक्रिय रहते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है।

“हमारे बच्चे अब स्कूल नहीं जा पाते क्योंकि हमें डर है कि कहीं सियार उन्हें न पकड़ लें,” ग्राम प्रधान ने कहा। इसके अलावा, मवेशियों और फसलों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि ये जानवर अक्सर खेतों और पशुओं पर हमला कर सकते हैं।

प्रशासन की कोशिशें और चुनौतियाँ

स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने इस समस्या को हल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। वन विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है और जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए पिंजरे भी लगाए हैं। इसके बावजूद, ग्रामीणों का कहना है कि ये प्रयास अपर्याप्त हैं और समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।

वन विभाग के अधिकारी ने कहा, “हमने गश्त बढ़ा दी है और पिंजरे लगाए हैं, लेकिन जंगली जानवरों की संख्या और उनकी गतिविधियाँ बहुत ज्यादा हैं। इसके अलावा, जंगलों की निकटता और पर्यावरणीय कारक भी समस्या को बढ़ाते हैं।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और भविष्य की योजनाएँ

इस घटना ने स्थानीय राजनीति को भी गर्म कर दिया है। विपक्षी नेताओं और स्थानीय नेताओं ने प्रशासन की नाकामी की आलोचना की है और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। गोपीगंज के विधायक ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की बात की है और सरकार को दोषी ठहराया है।

“सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। हमें चाहिए कि वन्यजीवों की गतिविधियों पर नियंत्रण पाना, और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता हो,” विधायक ने कहा।

समाधान की दिशा

ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग की है, जैसे कि वन्यजीव बाड़ लगाने की योजना, जिससे जानवर गांवों में प्रवेश न कर सकें। इसके अलावा, कुछ ने जंगली जानवरों के प्रबंधन के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाने की भी मांग की है।

स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे और जल्द ही ठोस कदम उठाएंगे। लेकिन ग्रामीणों की सुरक्षा और इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में क्या कदम उठाए जाएंगे, यह भविष्य के गर्त में है।

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Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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