पेट लूम की दरी और हैंडवोवेन कालीन पर जोर, 50वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले की तैयारियां तेज

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पेट लूम की दरी और हैंडवोवेन कालीन पर निर्यातकों का जोर, 50वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले की तैयारियां तेज

भदोही। चार से सात अक्तूबर तक भदोही में आयोजित होने वाले 50वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले को लेकर निर्यातकों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गोल्डेन जुबली कालीन मेले और दिल्ली फेयर स्थगित होने से इस बार भदोही के एक्सपो को लेकर निर्यातकों में खासा उत्साह है। निर्यातक अपने उत्पादों को नए रंग-रूप और डिजाइन के साथ खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने की तैयारी में जुटे हैं।

भदोही परिक्षेत्र के कालीन निर्यातकों का कहना है कि मौजूदा समय में महंगे कालीनों की मांग सीमित हो गई है। दूसरे देशों से आने वाले सस्ते कालीनों के कारण भारतीय निर्यातकों को भी प्रतिस्पर्धा के लिए किफायती उत्पादों पर ध्यान देना पड़ रहा है। यही वजह है कि इस बार मेले के लिए पेट लूम पर बनने वाली दरियों, हैंडलूम, हैंडटफ्टेड और हैंडवोवेन कालीनों के नए सैंपल तैयार किए जा रहे हैं।

पेट लूम ने बदली दरी की तस्वीर

निर्यातकों के अनुसार, परंपरागत लूम पर बनने वाली दरियां अब लगभग बंद हो चुकी हैं। उनकी जगह पेट लूम ने ले ली है। आधुनिक पेट लूम पर बनने वाली दरियों में डिजाइन और रंगों की काफी विविधता देखने को मिल रही है। इनमें अलग-अलग रंगों को आसानी से उकेरने के साथ ही लूप डालकर इन्हें और आकर्षक बनाया जा रहा है।

निर्यातक लोरीबफ्ट, शारुख, बिज्जार, इंडो नेपाली, सुमैक, टर्किश नॉट्स और बीड्स जैसे उत्पादों पर भी जोर दे रहे हैं। हालांकि इनकी लागत अधिक होने के कारण कीमत को लेकर निर्यातकों को बाजार में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

बिना ऑर्डर माल तैयार करने से बच रहे निर्यातक

अमेरिका की ओर से टैरिफ को लेकर जारी किए गए नए-नए आदेशों ने भी निर्यातकों की चिंता बढ़ाई है। पहले कई निर्यातक बिना ऑर्डर के भी कालीन तैयार कराकर गोदाम में रखते थे, लेकिन अब यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो रही है।

निर्यातकों का कहना है कि बिना ऑर्डर तैयार माल की बिक्री नहीं होने पर बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए इस समय उनका ज्यादा ध्यान तैयार उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्माण करने के बजाय नए और आकर्षक सैंपल तैयार करने पर है, ताकि मेले में खरीदारों की पसंद और ऑर्डर के आधार पर आगे उत्पादन किया जा सके।

हैंडवोवेन कालीनों पर भी बढ़ा भरोसा

निर्यातकों के मुताबिक हैंडवोवेन कालीनों में लगातार नई डिजाइन और विविधता आने से विदेशी खरीदारों की रुचि बढ़ रही है। पेट लूम की दरियों और हैंडवोवेन कालीनों को इस बार के एक्सपो में प्रमुखता से प्रदर्शित करने की तैयारी है। हालांकि निर्यातकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन उत्पादों के लिए उचित कीमत हासिल करना है।

निर्यातक एजाज अंसारी ने बताया कि महंगे नॉटेड कालीनों का हिस्सा अब निर्यात में काफी कम रह गया है। मौजूदा बाजार को देखते हुए पेट लूम की दरी, हैंडलूम, हैंडटफ्टेड और हैंडवोवेन कालीनों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

निर्यातक संजय गुप्ता के अनुसार, उत्पाद बनाने के लिए विकल्प तो बहुत हैं, लेकिन बाजार में उचित कीमत निकाल पाना मुश्किल हो गया है। अपने गृह जनपद में गोल्डेन जुबली एक्सपो होने के कारण कुछ नया प्रदर्शित करना जरूरी है। इस बार लोरी बफ्ट, शारुख, बिज्जार, इंडो नेपाली, सुमैक, टर्किश नॉट्स और बीड्स जैसे उत्पादों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मुख्य बिंदु

  • 4 से 7 अक्तूबर तक भदोही में होगा 50वां अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला
  • गोल्डेन जुबली एक्सपो को लेकर निर्यातकों में उत्साह
  • पेट लूम की दरी और हैंडवोवेन कालीनों पर विशेष फोकस
  • सस्ते और आकर्षक कालीनों के नए सैंपल तैयार
  • बिना ऑर्डर के माल तैयार करने से बच रहे निर्यातक
  • अमेरिका के टैरिफ आदेशों को लेकर निर्यातकों की चिंता
  • लोरी बफ्ट, शारुख, बिज्जार, सुमैक और टर्किश नॉट्स जैसे उत्पादों पर जोर

Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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