केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 5वीं और 8वीं में फेल होने पर नहीं मिलेगी अगली कक्षा में प्रमोशन

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अब 5वीं और 8वीं में फेल हुए तो रुकना होगा! केंद्र सरकार ने खत्म की ‘नो-डिटेंशन पॉलिसी’

नई दिल्ली: भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव! अब 5वीं और 8वीं कक्षा में फेल होने वाले छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने ‘नो-डिटेंशन पॉलिसी’ में बदलाव करते हुए सख्त नियम लागू किए हैं। यह ऐतिहासिक फैसला शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों को बुनियादी शिक्षा में मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।

क्या है नई शिक्षा नीति?

अब 5वीं और 8वीं कक्षा में छात्रों का मूल्यांकन कड़े मानकों पर होगा। यदि कोई छात्र न्यूनतम योग्यता पूरी नहीं करता है, तो उसे उसी कक्षा में रोक दिया जाएगा। हालांकि, छात्रों को एक और मौका दिया जाएगा—सुधारात्मक परीक्षा पास करके वे अगली कक्षा में जा सकते हैं।

फेल होने का डर या शिक्षा का सुधार?

2010 में लागू की गई ‘नो-डिटेंशन पॉलिसी’ का उद्देश्य था कि कक्षा 8 तक किसी भी छात्र को फेल न किया जाए। लेकिन हाल के सालों में इसकी आलोचना बढ़ती गई। विशेषज्ञों का कहना था कि यह नीति छात्रों में पढ़ाई के प्रति लापरवाही बढ़ा रही है।

केंद्र सरकार का यह कदम छात्रों को अनुशासन और गंभीरता सिखाने के लिए उठाया गया है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, “हमारा लक्ष्य है कि छात्र बुनियादी कौशल में सक्षम बनें, ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य मजबूत हो।”

अभिभावक क्या कहते हैं?

कुछ अभिभावकों ने इस फैसले का समर्थन किया है। उनका मानना है कि यह बच्चों में पढ़ाई की आदत विकसित करेगा। वहीं, कुछ चिंतित हैं कि इससे बच्चों पर दबाव बढ़ सकता है।

मुंबई की रहने वाली एक अभिभावक, रीता वर्मा कहती हैं, “बच्चों को सख्ती की जरूरत है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। सरकार को स्कूलों की सुविधाएं और शिक्षकों का प्रशिक्षण भी बढ़ाना चाहिए।”

क्या इस फैसले से सुधरेगी शिक्षा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करेगा। हालांकि, इसे सफल बनाने के लिए शिक्षकों का बेहतर प्रशिक्षण, स्कूलों में संसाधनों की उपलब्धता, और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा।

भारत क्रांति की राय:

यह बदलाव शिक्षा को एक नई दिशा में ले जाएगा। छात्रों में मेहनत और अनुशासन का भाव विकसित होगा। लेकिन सरकार, स्कूल, और अभिभावकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस नीति का उद्देश्य छात्रों के मानसिक और शैक्षणिक विकास के बीच संतुलन बनाना है।

क्या यह कदम देश के भविष्य को बदल पाएगा? अपनी राय हमें बताएं!

रिपोर्ट: भारत क्रांति न्यूज

Bharat Kranti News
Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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