‘सुरक्षित बचपन’ के दावे फेल! भदोही के 120 स्कूल अब भी बिना चहारदीवारी

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सुरक्षित बचपन’ के दावों के बीच भदोही के 120 विद्यालय बिना चहारदीवारी, बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे

ज्ञानपुर। सरकार एक ओर परिषदीय विद्यालयों में सुरक्षित और बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं भदोही जिले के 120 विद्यालय आज भी बिना चहारदीवारी के संचालित हो रहे हैं। ऐसे में विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आवारा कुत्तों, छुट्टा मवेशियों और बाहरी लोगों की आवाजाही से शिक्षक और अभिभावक लगातार चिंता में हैं।

जिले के 885 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के लगभग 1.33 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालयों के कायाकल्प के लिए शासन द्वारा ऑपरेशन कायाकल्प योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत 19 बुनियादी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। इनमें विद्यालय परिसर की सुरक्षा के लिए गेट सहित चहारदीवारी का निर्माण भी प्रमुख बिंदु है। इसके बावजूद जिले के 120 विद्यालय अभी तक इस महत्वपूर्ण सुविधा से वंचित हैं।

सड़क और जलाशयों के किनारे बने विद्यालय बने चिंता का कारण

बिना चहारदीवारी वाले कई विद्यालय मुख्य सड़कों, तालाबों और पोखरों के किनारे स्थित हैं। ऐसे विद्यालयों में छोटे बच्चों के दुर्घटना का शिकार होने की आशंका बनी रहती है। स्कूल समय में बच्चे खेलते-कूदते परिसर से बाहर निकल सकते हैं, वहीं छुट्टा पशु भी आसानी से परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

एमडीएम के समय बढ़ जाती है परेशानी

विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) के दौरान स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। भोजन की गंध से बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते विद्यालय परिसर में पहुंच जाते हैं। कई बार कुत्तों के बीच भोजन को लेकर झगड़ा भी होता है, जिससे बच्चों पर हमला होने का खतरा बना रहता है। ऐसे समय में शिक्षकों को पढ़ाई छोड़कर बच्चों की सुरक्षा की निगरानी करनी पड़ती है।

शिक्षकों को निभानी पड़ रही दोहरी जिम्मेदारी

पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोदमा के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार मौर्य ने बताया कि विद्यालय में चहारदीवारी निर्माण की मांग कई बार संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मध्याह्न भोजन के दौरान शिक्षकों की अलग-अलग ड्यूटी लगानी पड़ती है ताकि कोई आवारा कुत्ता या मवेशी बच्चों के बीच न पहुंच सके। इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ जाती है और शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित होता है।

छुट्टी के बाद विद्यालय बन जाता है पशुओं का ठिकाना

चहारदीवारी नहीं होने के कारण विद्यालय परिसर दिनभर छुट्टा मवेशियों का चारागाह बना रहता है। पशुओं के कारण परिसर में गंदगी फैलती है और खेल मैदान भी खराब हो जाते हैं। वहीं अवकाश के दिनों में असामाजिक तत्व विद्यालय परिसर में बैठकर अराजक गतिविधियां करते हैं, जिससे विद्यालय की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है।

ऑपरेशन कायाकल्प की रफ्तार पर उठ रहे सवाल

शासन की महत्वाकांक्षी ऑपरेशन कायाकल्प योजना का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को आधुनिक और सुरक्षित बनाना है। हालांकि, वर्षों बाद भी बड़ी संख्या में विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण न होना योजना की धीमी प्रगति को दर्शाता है। शिक्षा विभाग का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी कई विद्यालय इस बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।

अभिभावकों और ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिन विद्यालयों में अब तक चहारदीवारी नहीं बनी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी योजना से अधिक महत्वपूर्ण है और बिना सुरक्षित परिसर के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना अधूरी है।

मुख्य बिंदु

  • जिले के 120 परिषदीय विद्यालयों में अब भी चहारदीवारी नहीं
  • 1.33 लाख छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पर बना खतरा।
  • एमडीएम के समय विद्यालयों में पहुंच जाते हैं आवारा कुत्ते और छुट्टा मवेशी
  • शिक्षक पढ़ाई के साथ बच्चों की सुरक्षा की भी कर रहे निगरानी।
  • अभिभावकों ने जल्द चहारदीवारी निर्माण की उठाई मांग।

Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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