अंधेरे में इलाज: 7 दिन से बिजली विहीन गोपीगंज PHC, मरीजों की जान से खिलवाड़

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ज्ञानपुर

जनपद भदोही में स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गोपीगंज अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पिछले सात दिनों से बिना बिजली के संचालित हो रहा है, जिससे मरीजों को अंधेरे में इलाज कराना पड़ रहा है।

प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू होने के बाद जैसे ही स्मार्ट मीटर का बैलेंस खत्म हुआ, 18 मार्च से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। करीब 12 हजार रुपये का बकाया बिल इस संकट की वजह बना, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य केंद्रों जैसी जरूरी सेवाओं के लिए भी ऐसी व्यवस्था उचित है?


जब अस्पताल बना अंधेरा घर

गोपीगंज PHC का दृश्य किसी अस्पताल से ज्यादा एक अंधेरे कमरे जैसा नजर आता है।

  • वार्ड में भर्ती मरीज अंधेरे में पड़े हैं
  • ओपीडी में मरीजों की पर्ची बाहर बनाई जा रही है
  • अंदर केवल एक-दो कमरों में ही हल्की रोशनी है

गर्मी और उमस के बीच बिना पंखे और लाइट के इलाज कराना मरीजों के लिए किसी सजा से कम नहीं है।


डॉक्टर भी बेबस: खिड़की खोलकर कर रहे इलाज

प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अखिलेश सिंह को मजबूरी में अपने केबिन की खिड़की खोलकर मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है।
न तो पर्याप्त रोशनी है और न ही जरूरी उपकरण सही तरीके से काम कर पा रहे हैं।

यह स्थिति न केवल मरीजों के लिए जोखिम भरी है, बल्कि डॉक्टरों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।


सबसे व्यस्त PHC, फिर भी सबसे बदहाल

गोपीगंज का यह अर्बन PHC जिले के सबसे व्यस्त केंद्रों में से एक है।

  • रोजाना 70 से 80 मरीज इलाज के लिए आते हैं
  • कई मरीजों को भर्ती भी किया जाता है

इसके बावजूद बुनियादी सुविधा—बिजली—का अभाव यह दर्शाता है कि सिस्टम किस स्तर पर लापरवाह है।


किराया, बजट और सिस्टम की उलझन

यह PHC एक किराए के भवन में संचालित होता है, जिसका मासिक किराया 30 हजार रुपये है।

  • पिछले 3 महीनों से किराया नहीं दिया गया
  • बिजली का बिल अलग से विभाग के जिम्मे है
  • बजट के अभाव में मीटर रिचार्ज नहीं हो पाया

मकान मालिक विजय नाथ मौर्या का कहना है कि बार-बार कहने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, जिससे स्थिति और बिगड़ती गई।


इन्वर्टर के सहारे चल रही व्यवस्था

बिजली संकट के बीच स्वास्थ्यकर्मी खुद बाजार जाकर इन्वर्टर की बैटरियां चार्ज करवा रहे हैं।

  • बैकअप सिर्फ 2 दिन तक चलता है
  • केवल 2 कमरों में लाइट जलती है
  • बाकी पूरा केंद्र अंधेरे में डूबा रहता है

यह अस्थायी समाधान भी स्थायी परेशानी को छिपा नहीं पा रहा।


मरीजों की पीड़ा: “अस्पताल में भी डर लग रहा”

मरीजों ने अपनी परेशानी खुलकर बताई—

👉 “पहले पंखा चलता था, अब अंधेरे में दवा लेनी पड़ रही है।” – बरमदेवी, गेराई
👉 “कुछ दिखाई नहीं देता, गिरते-गिरते बची हूं।” – मीना सिंह, अंजनी मोहाल

मरीजों का कहना है कि इलाज के दौरान डर बना रहता है और कई बार चोट लगने का खतरा भी रहता है।


नई बाजार PHC भी नहीं बचा

मंगलवार को नई बाजार अर्बन PHC में भी यही समस्या देखने को मिली।
स्मार्ट मीटर का बैलेंस खत्म होते ही चार घंटे तक बिजली गुल रही।
हालांकि शाम तक मीटर रिचार्ज होने के बाद आपूर्ति बहाल कर दी गई।

यह घटना साफ संकेत देती है कि यह समस्या केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं है।


प्रशासन का बयान और सवाल

सीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि—

  • नई बाजार PHC का मीटर रिचार्ज कर दिया गया है
  • गोपीगंज PHC का मीटर भी जल्द रिचार्ज किया जाएगा
  • लापरवाही की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि:
 क्या स्वास्थ्य केंद्रों को भी प्रीपेड बिजली पर छोड़ना सही है?
 क्या बजट की कमी के कारण मरीजों की जान जोखिम में डाली जा सकती है?


PHC की स्थिति (फैक्ट बॉक्स):

  • 12 स्वास्थ्यकर्मी तैनात
  • अगस्त 2024 से संचालन
  • 30,000 रुपये मासिक किराया
  • 6 महीने पहले लगा स्मार्ट प्रीपेड मीटर
  • रोजाना 70-80 मरीजों की ओपीडी

निष्कर्ष (Impact Line):

गोपीगंज PHC की यह स्थिति केवल एक केंद्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की खामी को उजागर करती है।
अगर समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

Ashu Jha : Bharat Kranti News
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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