चौरी में शोक: 1971 भारत-पाक युद्ध के शहीद की पत्नी उषा देवी का निधन
चौरी (भदोही)। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए रमाशंकर दीक्षित की पत्नी उषा देवी (70) का बुधवार को निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं और उनका उपचार वाराणसी के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
उषा देवी मूल रूप से चौरी के माधोरामपुर की रहने वाली थीं। उनका विवाह वर्ष 1969 में मोढ़ क्षेत्र के बरमोहनी निवासी रमाशंकर दीक्षित से हुआ था। विवाह के लगभग डेढ़ वर्ष बाद ही वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में रमाशंकर दीक्षित देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। उस समय वे भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस खुकरी पर तैनात थे और उषा देवी अपने मायके में थीं। उस वक्त उनकी उम्र महज 16-17 वर्ष के बीच थी।
पति के शहीद होने के बाद उषा देवी ने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य के साथ जीवन बिताया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र को अपना कर्मक्षेत्र बनाया और हरियावं स्थित कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर सेवाएं दीं। अपने सरल स्वभाव, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के कारण वे क्षेत्र में सम्मानित शिक्षिका के रूप में जानी जाती थीं।
परिजनों के अनुसार पति के शहीद होने के बाद वे अधिकांश समय अपने मायके में ही रहीं, जहां उनके भाइयों ने उनका पूरा सहयोग और देखभाल की। इसके बावजूद उन्होंने ससुराल पक्ष से भी आत्मीय संबंध बनाए रखे और पारिवारिक कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल होती रहीं।
बुधवार को वाराणसी के मणिकार्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके देवर सुरेंद्र दीक्षित ने मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग और ग्रामीण मौजूद रहे। रविंद्र उपाध्याय, संतोष उपाध्याय, अरविंद दीक्षित सहित बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
उषा देवी के निधन से क्षेत्र ने एक ऐसी महिला को खो दिया, जिसने कम उम्र में पति को खोने के बाद भी साहस, आत्मसम्मान और सेवा की मिसाल कायम की।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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