सीएचसी खांसी-बुखार तक सीमित, गंभीर मरीजों को 40 किमी दौड़ लगानी पड़ रही

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सीएचसी खांसी-बुखार के इलाज तक सिमटे, गंभीर मरीजों को लगानी पड़ रही 40 किमी की दौड़

ज्ञानपुर (भदोही)। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों केवल मौसमी बीमारियों — खांसी व बुखार — के इलाज तक सिमटकर रह गए हैं। हालात यह हैं कि यहां न तो जांच की पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती। इसका सीधा खामियाजा गांवों के हजारों मरीजों को उठाना पड़ रहा है।

गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीजों को 35 से 40 किलोमीटर दूर महाराजा चेत सिंह जिला चिकित्सालय या महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय जाना पड़ता है, तभी उन्हें समुचित उपचार मिल पाता है।


डीघ सीएचसी: डेढ़ से दो लाख आबादी पर केवल मौसमी दवाएं

करीब 1.5 से 2 लाख की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा देने वाले डीघ सीएचसी पर सिर्फ साधारण मौसमी बीमारियों की दवाएं उपलब्ध हैं।
गंभीर मरीजों को दवा और जांच के लिए मजबूरन निजी अस्पतालों या 40 किमी दूर स्थित जिला अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है।

कोनिया, धनतुलसी, सीतामढ़ी, नारेपार, बेरवा पहाड़पुर, गडेरिया की बारी, केवटाहीं जैसे गांवों के लोग जिला मुख्यालय का रुख करते हैं। यहां लगा हेल्थ एटीएम शोपीस बन चुका है, क्योंकि इसका उपयोग न के बराबर हो रहा है।


ऊंज क्षेत्र: 30 गांवों में एक भी स्वास्थ्य केंद्र नहीं

ऊंज क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों में स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा तक मौजूद नहीं है।
भानीपुर-दुर्गागंज सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं, जबकि खून जांच भी सिर्फ औपचारिकता तक सीमित है। परिणामस्वरूप गांवों के मरीजों को 25–30 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है।


सुरियावां सीएचसी: सबसे अधिक ओपीडी, सुविधाएं शून्य

सुरियावां सीएचसी पर सबसे अधिक ओपीडी होती है।
यहां जौनपुर और भदोही दोनों जिलों के मरीज बड़ी संख्या में उपचार कराने पहुंचते हैं।

आने वाले प्रमुख गांव —
जौनपुर: कूसा, आलमगंज, तिवारीपुर, बनकट, कारो आदि
भदोही: अभिया, सुरियावां नगर, कस्तूरीपुर, कैड़ा, महुआपुर, महजूदा, चौगुना आदि

हालांकि, यहां भी जांच सुविधाएं शून्य हैं और मरीजों को गंभीर स्थिति में बाहर जाना पड़ता है।


चौरी और औराई क्षेत्र: 20–25 किमी दूर इलाज की मजबूरी

चौरी क्षेत्र के ग्रामीणों को भदोही या वाराणसी स्थित अस्पतालों तक 20–25 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
औराई क्षेत्र के पिलखिनी निवासी सुखराज बिंद बताते हैं कि गंभीर बीमारी की स्थिति में सीधे वाराणसी जाना ही बेहतर लगता है, क्योंकि जिला मुख्यालय से आगे रेफर किया जाना तय होता है।

उन्होंने कहा—
“अस्पताल की व्यवस्था सुधारी जाए तो लोगों को इतनी दूर नहीं जाना पड़े।”


निष्कर्ष

जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मात्र प्राथमिक उपचार तक सीमित हो गए हैं।
जांच सुविधाओं के अभाव, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और दवाओं की सीमित उपलब्धता के कारण ग्रामीण मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि सीएचसी की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं और जांच सुविधाएं तत्काल शुरू हों।

Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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