19 साल की उम्र में 10,000 मीटर मैराथन जीतने वाले अंतरराष्ट्रीय एथलीट मुरलीधर बिंद का निधन
भदोही/डीघ। भारतीय एथलेटिक्स इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज नाम, अंतरराष्ट्रीय धावक और बीएसएफ के पूर्व डिप्टी कमांडेंट मुरलीधर बिंद (70) अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार थे।
उनके निधन की सूचना मिलते ही जिले में खेल जगत, प्रशासन, सेना और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।
उनके गांव में पहली बार गूंजा — “लास्ट सल्यूट”
गुरुवार शाम जब उनका पार्थिव शरीर मदनपुर गांव पहुंचा, तो वातावरण गमगीन हो उठा।
बीएसएफ यूनिट की मौजूदगी में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया—यह सम्मान केवल देश के लिए असाधारण सेवा देने वालों को ही मिलता है।
जिस मैदान से उन्होंने दौड़ना शुरू किया था, वहीं उन्हें अंतिम सलामी दी गई—यह दृश्य हर किसी को भावुक कर गया।
जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अफसर हुए उपस्थित
उनके आवास पर जिलाधिकारी शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक, सांसद प्रतिनिधि, विधायकों, पूर्व सैनिकों और खेल प्रेमियों की लंबी कतार लगी रही।
हर कोई कह रहा था — “भदोही ने आज अपना रत्न खो दिया।”
40 मेडल और एक महान सफर — मुरलीधर की उपलब्धियाँ
| श्रेणी | मेडल |
|---|---|
| स्वर्ण (Gold) | 20 |
| रजत (Silver) | 11 |
| कांस्य (Bronze) | 9 |
| कुल मेडल | 40 |
13 साल की उम्र में ट्रैक पर कदम, 19 वर्ष में भारत का गौरव
1977 में केवल 19 वर्ष की आयु में उन्होंने:
5000 मीटर
10000 मीटर
मैराथन
तीनों बड़े इवेंट जीतकर भारतीय एथलेटिक्स में इतिहास रचा था।
सबसे तेज़—2 घंटे 18 मिनट
उन्होंने 2 घंटे 18 मिनट में मैराथन पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया, जो उस समय अभूतपूर्व माना गया।
🇮🇳 भारत के पहले ओपन मैराथन मेडल विजेता
उनकी सबसे बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक —
विश्व स्तर पर भारत को पहला ओपन मैराथन मेडल दिलाना था।
यह उपलब्धि आज भी भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है।
सेना में अद्भुत पहचान — 5 फीट की ऊंचाई, लेकिन हौसला पर्वत जैसा
हालांकि उनकी ऊंचाई केवल 5 फीट थी, लेकिन उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना बड़े कद वाले भी नहीं देख पाते—
✔ कमांडो क्वालिफिकेशन
✔ BSF में 38 वर्ष 8 माह सेवा
✔ डिप्टी कमांडेंट के पद से सेवानिवृत्ति
वे दुनिया के सबसे कम कद वाले कमांडो क्वालिफाइड सैनिकों में शामिल थे।
सेवानिवृत्ति के बाद भी सपना — “एक ओलंपिक, भदोही से”
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खुद को सीमित नहीं किया।
उनका सपना था — भदोही और पूर्वांचल से ओलंपिक स्तर का धावक तैयार करना।
वे कहते थे:
“दौड़ सिर्फ खेल नहीं, जीवन का अनुशासन है।”
परिवार में दुख की लहर
परिवार में पत्नी, पुत्र सुरेंद्र सहित अन्य सदस्य हैं।
सुरेंद्र ने भावुक होते हुए कहा:
“पापा आखिरी समय तक कहते रहे — ‘मेरा सपना युवा पूरा करेंगे।’”
अंतिम विदाई — एक एथलीट नहीं, एक युग का अंत
बेहरोजपुर गंगा घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान खिलाड़ियों, जवानों और स्थानीय लोगों ने नम आँखों से विदाई दी।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

