ज्ञानपुर: 35 लाख की स्वीकृति, 17 विद्यालयों में बच्चों को मिलेगी डेस्क-बेंच की सुविधा — शुरू हुई खरीद की तैयारी
ज्ञानपुर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में शासन ने बड़ा कदम उठाया है। 17 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के लिए तीन-सीटर डेस्क-बेंच खरीद हेतु 35 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है। बजट जारी होते ही बेसिक शिक्षा विभाग ने आपूर्ति और निविदा प्रक्रिया की तैयारियां तेज कर दी हैं, जिससे छात्रों को जल्द ही फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
बच्चे अब जमीन पर बैठने से होंगे मुक्त
जिले में अब भी कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों को फर्श पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। ऑपरेशन कायाकल्प सहित अन्य योजनाओं के कारण विद्यालयों की इमारतें बदली हैं, लेकिन फर्नीचर की कमी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई थी। नए बजट से इन 17 स्कूलों में इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।
कितने बच्चों को मिलेगा लाभ
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कुल विद्यालय: 885 (प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट)
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पंजीकृत बच्चे: लगभग 1,40,000
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अब तक फर्नीचर की सुविधा: लगभग 650 विद्यालयों में आंशिक
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नई स्वीकृति: 17 विद्यालय
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प्रति बेंच लागत: ₹8,519
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कुल बजट: ₹35 लाख
इन स्कूलों में फर्नीचर पहुंचने से छात्र-छात्राओं के बैठने की व्यवस्था में सुधार होगा और पढ़ाई में आसानी के साथ शैक्षणिक माहौल भी बेहतर होगा।
2021 के बाद बढ़ा ध्यान, लेकिन 2024 में रुक गया बजट
शासन ने वर्ष 2021 के बाद विद्यालयों में डेस्क-बेंच की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया।
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2021, 2022 और 2023 में करीब 300 विद्यालयों में बेंच आपूर्ति की गई
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2024 में बजट जारी न होने के कारण प्रक्रिया रुक गई
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2025 में फिर से 17 विद्यालयों के लिए स्वीकृति जारी
शिक्षकों का कहना है कि यदि हर वर्ष इसी गति से बजट जारी होता रहा, तो आने वाले वर्षों में जिले के सभी विद्यालयों में फर्नीचर की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
जनप्रतिनिधियों से सहयोग की भी पहल
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवम पांडेय ने बताया —
“शासनादेश के तहत शीघ्र ही निविदा आमंत्रित कर खरीद की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। चिह्नित विद्यालयों में डेस्क-बेंच की आपूर्ति समयबद्ध तरीके से कराई जाएगी। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से भी सहयोग लेकर विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।”
जमीनी वास्तविकता
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार —
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कई विद्यालयों में कक्षाएँ स्मार्ट हो गई हैं,
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लेकिन कुर्सी-टेबल की कमी शैक्षणिक गुणवत्ता पर सीधा असर डाल रही है।
शिक्षकों का कहना है कि जब बच्चे आराम से बैठते हैं, तो उनकी पढ़ाई में ध्यान और उपस्थिति दोनों बढ़ती है।
अभिभावकों की भी प्रतिक्रिया
कुछ अभिभावकों ने कहा कि
“सरकारी स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई और सुविधा दोनों बेहतर होती जाएं तो लोग निजी स्कूलों की ओर जाने की बजाय सरकारी स्कूलों पर विश्वास बढ़ाएंगे।”
विशेष रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्वीकृत बजट | ₹35 लाख |
| स्वीकृत विद्यालय | 17 विद्यालय |
| प्रति बेंच लागत | ₹8,519 |
| कुल छात्र आधार | 1.40 लाख |
| जिले में कुल विद्यालय | 885 |
| अब तक आंशिक फर्नीचर व्यवस्था | 650 विद्यालय |
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।


