भदोही के कालीन उद्योग की आवाज दिल्ली तक, सीईपीसी चेयरमैन ने पीएम मोदी को बताईं प्राथमिकताएं

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सीईपीसी चेयरमैन ने प्रधानमंत्री मोदी से बताई कालीन उद्योग की प्राथमिकताएं

भदोही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली में देश की चुनिंदा निर्यात संवर्धन परिषदों (Export Promotion Councils) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर हालिया वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों, भारतीय निर्यात को बढ़ाने की रणनीति, और मेक इन इंडिया विजन की दिशा पर गहन चर्चा की।

इस दौरान कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (CEPC) के चेयरमैन कुलदीप राज वाटल ने भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की स्थिति, संभावनाओं और नीतिगत जरूरतों पर प्रधानमंत्री को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत का कालीन उद्योग न केवल देश की संस्कृति और हस्तशिल्प परंपरा का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है।

वाटल ने बताया कि वर्तमान में यह उद्योग भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, आगरा, जयपुर, पानीपत और श्रीनगर जैसे प्रमुख केंद्रों में सक्रिय है। इन इलाकों में करीब 25 लाख से अधिक बुनकर, मजदूर और कारीगर कार्यरत हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जो अपने हुनर से न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को आत्मनिर्भर बना रही हैं।

चेयरमैन ने प्रधानमंत्री के समक्ष कालीन उद्योग को और सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत सिफारिशें रखीं —

कालीन परिक्षेत्र को “अति विशेष दर्जा” प्रदान किया जाए ताकि इस क्षेत्र को विशेष प्रोत्साहन मिल सके।
 कालीन उद्योग को फोकस्ड प्रोडक्ट्स की श्रेणी में शामिल किया जाए जिससे निर्यातकों को अतिरिक्त लाभ मिल सके।
ब्याज क्षतिपूर्ति योजना (Interest Subvention Scheme) का दायरा बढ़ाया जाए ताकि छोटे निर्यातक और बुनकर भी लाभान्वित हो सकें।
“हैंडमेड इन इंडिया – क्राफ्टिंग स्टोरीज” जैसे अभियान को विश्व स्तर पर प्रमोट किया जाए जिससे भारतीय कालीनों की ब्रांड वैल्यू बढ़े।
निर्यात प्रोत्साहन सहायता (Export Incentives) में वृद्धि की जाए ताकि भारतीय कालीन अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मजबूत हो सकें।
आयकर अधिनियम की धारा 43-B(H) को कालीन उद्योग से हटाया जाए, क्योंकि इससे उद्योग पर अनावश्यक कर बोझ बढ़ रहा है।
ईसीजीसी प्रीमियम (Export Credit Guarantee Corporation) के बोझ को घटाया जाए ताकि निर्यातकों को राहत मिल सके।

वाटल ने यह भी बताया कि भारतीय कालीन उद्योग प्रतिवर्ष करीब 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात करता है और वैश्विक हस्तनिर्मित कालीन बाजार में 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन सिफारिशों को लागू करती है तो भारत विश्व के कालीन बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा तथा लाखों ग्रामीण परिवारों को रोजगार और स्थिर आय का अवसर मिलेगा।

वाटल ने प्रधानमंत्री को यह भी अवगत कराया कि कालीन उद्योग सस्टेनेबल प्रोडक्शन, इको-फ्रेंडली डाईज़, और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। इससे भारतीय कालीन न केवल परंपरा बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह उद्योग प्रधानमंत्री के “आत्मनिर्भर भारत”, “वोकल फॉर लोकल”, और “मेक इन इंडिया” विजन को साकार करने का प्रमुख माध्यम बन सकता है।

कुलदीप राज वाटल ने यह भी जोर दिया कि अगर कालीन उद्योग को समुचित नीतिगत समर्थन और वित्तीय सुविधाएं मिलती हैं, तो यह सेक्टर ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक सकता है और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

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Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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