छतरपुर में एनजीटी आदेशों की उड़ रही धज्जियां, खुले में जल रहा कचरा, धुएं से बिगड़ रही हवा

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छतरपुर में एनजीटी के आदेशों की उड़ रही धज्जियां, खुले में जल रहा कचरा, धुएं में घुलती सेहत

छतरपुर, मध्यप्रदेश।
शहर में दीपावली की सफाई ने जहाँ घरों को चमका दिया है, वहीं दूसरी ओर कचरे के ढेरों में आग लगने से छतरपुर की हवा जहरीली हो रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा 2016 में खुले में कचरा जलाने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के बावजूद, न तो नगरपालिका और न ही नागरिक इसे गंभीरता से ले रहे हैं।

हर रोज़ सुबह और शाम शहर की गलियों, मोहल्लों और बाजारों में उठता धुआं अब आम दृश्य बन चुका है।


खुले में जल रहा कचरा, लापरवाही बनी ‘आदत’

शहर के मुख्य चौराहों से लेकर कालोनियों तक हर जगह प्लास्टिक, पॉलीथिन और घरेलू कचरे को खुले में जलाया जा रहा है।
सड़क किनारे, खाली प्लॉटों और डंपिंग पॉइंट्स पर कचरा जलाने का सिलसिला लगातार जारी है।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, कई बार सफाईकर्मी खुद कचरा उठाने की बजाय वहीं आग लगा देते हैं ताकि मेहनत बचाई जा सके। इस लापरवाही के कारण हवा में विषैले तत्व फैल रहे हैं जो पर्यावरण और सेहत दोनों के लिए खतरनाक हैं।

“सुबह घर से निकलते ही धुआं और बदबू से आंखें जलने लगती हैं। बच्चे खांसते रहते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती,”
अमित तिवारी, स्थानीय निवासी


स्वास्थ्य पर घातक असर, बढ़ती बीमारियां

विशेषज्ञों का कहना है कि कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म कणों से भरा होता है, जो फेफड़ों में गहराई तक पहुंचते हैं।
इस धुएं में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और डाइऑक्सिन्स जैसी गैसें सांस, आंख और त्वचा की बीमारियों को जन्म देती हैं।

छतरपुर जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार —

“पिछले कुछ हफ्तों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में लगभग 30 से 35% की बढ़ोतरी हुई है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।”


कचरा प्रबंधन व्यवस्था ध्वस्त

नगरपालिका की लापरवाही साफ दिख रही है। शहर के विभिन्न हिस्सों में अस्थायी डंपिंग साइट्स बन चुकी हैं। वहां सड़ा-गला कचरा, जानवरों की हड्डियां, प्लास्टिक और खाने का बचा मलबा एक साथ फेंका जा रहा है।
कई बार इन जगहों पर कचरा खुद ही सुलग उठता है, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, छतरपुर शहर में हर दिन करीब 70 टन ठोस कचरा निकल रहा है, जबकि प्रोसेसिंग की क्षमता केवल 50 टन तक सीमित है। बाकी कचरा या तो खुले में पड़ा रहता है या जल जाता है।


2016 में लागू हुआ था एनजीटी आदेश — अब तक कार्रवाई शून्य

दिसंबर 2016 में एनजीटी ने देशभर में खुले में कचरा जलाने पर प्रतिबंध लगाया था।
आदेश के तहत:

  • छोटे मामलों में ₹5,000

  • बड़ी मात्रा में कचरा जलाने पर ₹25,000 जुर्माना तय किया गया था।

परंतु छतरपुर में इस आदेश को लागू करने की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न तो जुर्माने की प्रक्रिया अपनाई गई और न ही मॉनिटरिंग टीम बनाई गई।


कानून है पर सख्ती नहीं — प्रशासन मौन

नगरपालिका अधिकारी दावा करते हैं कि शहर को स्वच्छ रखने के प्रयास जारी हैं।

“स्वच्छता में नागरिकों का सहयोग आवश्यक है। जो लोग खुले में कचरा जलाते हैं, उनके खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा,”
नगरपालिका अधिकारी, छतरपुर

लेकिन वास्तविकता यह है कि न तो कोई फील्ड मॉनिटरिंग टीम बनाई गई है और न ही एनजीटी गाइडलाइंस का पालन करवाने के लिए कोई निगरानी तंत्र।


क्या कह रहे हैं पर्यावरण विशेषज्ञ

“कचरा जलाना केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि एक ‘साइलेंट किलर’ है। इससे हवा में डाइऑक्सिन्स जैसे तत्व फैलते हैं जो कैंसर तक का कारण बन सकते हैं। यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तो आने वाले सालों में छतरपुर की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच जाएगी।”
डॉ. वी.के. मिश्रा, पर्यावरण विशेषज्ञ


जनजागरूकता की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि नगरपालिका को नागरिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।
स्कूलों, मोहल्लों और बाजारों में पोस्टर, घोषणाएं और सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों को बताया जाए कि खुले में कचरा जलाना सिर्फ कानून तोड़ना नहीं, बल्कि अपनी ही सांसों को जहरीला बनाना है।


समाधान क्या है?

वेस्ट सेग्ग्रिगेशन: घरों से कचरा अलग-अलग बायोडिग्रेडेबल और नॉन-बायोडिग्रेडेबल रूप में लिया जाए।
सख्त जुर्माना: खुले में जलाने वालों पर ₹5,000 से ₹25,000 तक का जुर्माना लगे।
जागरूकता अभियान: नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण की समझ बढ़ाई जाए।
कचरा प्रसंस्करण यूनिट बढ़ाई जाए: ताकि 100% कचरा रीसाइक्लिंग हो सके।


सोशल मीडिया पर छाया मुद्दा

स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर कचरे से उठते धुएं की तस्वीरें पोस्ट कर #ChhatarpurPollution और #NGTViolation जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए हैं। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन अगर अब भी नहीं जागा तो आने वाले वर्षों में सांस लेना मुश्किल हो जाएगा।


निष्कर्ष

छतरपुर की सड़कों पर जलता कचरा केवल एक “सफाई का शॉर्टकट” नहीं, बल्कि नागरिक लापरवाही और प्रशासनिक असफलता का प्रतीक है।
यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो शहर की हवा और आने वाली पीढ़ियों की सेहत दोनों पर भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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