सीबीएसई ने लीगल स्टडीज़ सिलेबस में बड़ा बदलाव, अब पढ़ाए जाएंगे नए आपराधिक कानून
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 11वीं और 12वीं के लीगल स्टडीज़ (Legal Studies) विषय के पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक बदलाव किया है। बोर्ड ने यह फैसला लिया है कि अब छात्रों को पुराने और अप्रासंगिक हो चुके कानूनी प्रावधानों—जैसे तीन तलाक, राजद्रोह और धारा 377—की जगह भारत के हाल ही में लागू हुए नए आपराधिक कानून पढ़ाए जाएंगे। इनमें शामिल हैं—
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भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS)
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भारतीय न्याय प्रक्रिया संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita – BNSS)
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भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam – BSA)
ये नए कानून 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू हो चुके हैं, जिन्होंने भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की जगह ली है।
बदलाव क्यों ज़रूरी था?
सीबीएसई अधिकारियों ने बताया कि सीनियर सेकेंडरी स्तर पर विधि अध्ययन (Legal Studies) की शुरुआत लगभग पांच साल पहले की गई थी, ताकि छात्रों को न्याय और कानून की बुनियादी समझ दी जा सके। लेकिन, इसके बाद सिलेबस में अपडेट की रफ्तार बेहद धीमी रही और इसमें अभी तक पुराने कानूनी प्रावधान ही शामिल थे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शिक्षा प्रणाली को समयानुकूल और व्यावहारिक बनाने पर ज़ोर दिया गया है। इसी के अनुरूप, लीगल स्टडीज़ में भी ऐसे प्रावधान शामिल करने की आवश्यकता महसूस की गई, जो वर्तमान न्याय व्यवस्था और अदालतों में लागू कानूनों के अनुरूप हों।
आगे की प्रक्रिया
सीबीएसई ने घोषणा की है कि इस बदलाव को लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) बनाई जाएगी। यह समिति न केवल नए सिलेबस को तैयार करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि किस प्रकार से छात्रों को कानून की पढ़ाई अधिक इंटरएक्टिव, केस-बेस्ड और प्रैक्टिकल तरीके से कराई जाए।
इसके अलावा, आवश्यकता पड़ने पर बोर्ड एक सामग्री विकास एजेंसी (Content Development Agency) भी नियुक्त करेगा, जो नए कानूनों के अनुसार पूरी तरह अपडेटेड और सटीक पाठ्यपुस्तकें तैयार करेगी। लक्ष्य है कि ये किताबें 2026-27 शैक्षणिक सत्र तक छात्रों तक पहुंच जाएं।
छात्रों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कानून विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। इससे उन्हें न्याय व्यवस्था की वास्तविक और अद्यतन जानकारी मिलेगी। जो छात्र भविष्य में कानून, सिविल सेवा, पुलिस सेवा, न्यायिक सेवा या कॉर्पोरेट लॉ में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह बदलाव एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
छात्रों का कहना है कि अगर सिलेबस में नए कानूनों के साथ-साथ व्यावहारिक उदाहरण, मूट कोर्ट सेशन, और कोर्ट विजिट जैसी गतिविधियां भी जोड़ी जाएं तो पढ़ाई और भी रोचक और उपयोगी हो सकती है।
नए कानूनों के तहत प्रमुख बदलाव
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भारतीय न्याय संहिता (BNS) – अपराधों की परिभाषा और दंड में कई नए प्रावधान, जैसे संगठित अपराध, साइबर अपराध और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर कठोर सज़ा।
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भारतीय न्याय प्रक्रिया संहिता (BNSS) – मुकदमों की सुनवाई और जांच में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग, फास्ट-ट्रैक प्रोसीजर और पीड़ितों के अधिकारों पर ज़ोर।
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भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) – डिजिटल सबूतों (Digital Evidence) को कानूनी मान्यता और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश।
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.


