तीन महीने बाद आई रिपोर्ट में खुलासा: 150 में से 83 खाद्य सैंपल फेल, पनीर-मिठाइयों में भारी मिलावट
ज्ञानपुर।
जिले में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री थमने का नाम नहीं ले रही है। खाद्य विभाग द्वारा तीन महीने पहले लिए गए 150 खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट अब सामने आई है, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 150 में से 83 सैंपल फेल पाए गए हैं, जबकि दो सैंपल असुरक्षित श्रेणी में रखे गए हैं।
जांच में बाजार में बिक रहे पनीर, मिठाई, खोवा, दूध, बेसन और बूंदी के लड्डू तक मिलावटी पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बूंदी के लड्डू में कीड़े मिले, जबकि कई मिठाइयों में हानिकारक रंगों की मात्रा तय मानक से अधिक पाई गई।
दीपावली के सैंपलों में भी गड़बड़ी
दीपावली पर्व के दौरान लिए गए 40 सैंपलों में से 22 की रिपोर्ट आ चुकी है, जिसमें 11 नमूने अधोमानक पाए गए हैं। अप्रैल 2025 से दिसंबर तक लिए गए कुल 200 सैंपलों में से 150 की रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिनमें 83 सैंपल फेल हैं।
पनीर और दूध सबसे ज्यादा संदिग्ध
जिन खाद्य पदार्थों के सैंपल फेल हुए हैं, उनमें पनीर के 20, मिठाई के 18, दूध के 12 और खोवा के 10 सैंपल शामिल हैं। पनीर के अधिकांश नमूनों में आवश्यक फैट की मात्रा नहीं पाई गई।
मानकों के अनुसार उच्च श्रेणी के पनीर में 50 प्रतिशत, मध्यम श्रेणी में 30 से 50 प्रतिशत और सामान्य श्रेणी में 18 से 20 प्रतिशत फैट होना जरूरी है।
दूध में वसा की जगह शरीर के लिए बेहद हानिकारक विजातीय वसा (फॉरेन फैट) और वेजिटेबल ऑयल की मिलावट पाई गई है।
कास्टिक सोडा से बन रहा पनीर
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक मालवीय ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पनीर बनाने में कास्टिक सोडा का इस्तेमाल किया जा रहा है। मटर के बेसन में कीड़े मिले हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं और लीवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
डॉक्टर की चेतावनी
फिजिशियन डॉ. प्रदीप यादव ने बताया कि मिलावटी खोवा और पनीर लीवर को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। इनमें मौजूद केमिकल्स एलर्जी, फूड पॉइजनिंग और लंबे समय में लीवर डैमेज का कारण बन सकते हैं। लोगों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
बोतलबंद पानी के सैंपल भी जांच में
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि भदोही के बीडा स्थित साधना नीर और औराई के ब्लू हैवेन नीर के बोतलबंद पानी के दो सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
कार्रवाई की तैयारी
रिपोर्ट आने के बाद खाद्य विभाग मिलावट करने वाले दुकानदारों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में वाद दाखिल करने की तैयारी में जुट गया है।
जिले में खोवे की खपत ज्यादा, उत्पादन बेहद कम
जानकारों के अनुसार जिले में करीब 500 से अधिक मिठाई की दुकानें संचालित हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में खोवे से बनी मिठाइयों की बिक्री होती है। जबकि जिले में इतनी बड़ी मात्रा में खोवे का उत्पादन संभव नहीं है। मांग पूरी करने के लिए दूसरे शहरों और जिलों से भारी मात्रा में मिलावटी खोवा मंगाया जा रहा है, जो सीधे आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ है।
त्योहारों में बढ़ जाती है मिलावट
खाद्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक त्योहारों के समय मिलावटखोर ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। दीपावली, होली और शादी-विवाह के सीजन में मिठाइयों, पनीर और दूध की मांग बढ़ने के साथ ही मिलावट का खेल भी तेज हो जाता है। दीपावली पर लिए गए सैंपलों में 50 प्रतिशत से अधिक के फेल होने ने विभाग की चिंता और बढ़ा दी है।
क्यों खतरनाक है मिलावटी पनीर
विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी पनीर में कास्टिक सोडा, सिंथेटिक दूध और रसायनों का उपयोग किया जाता है। इससे पेट दर्द, उल्टी-दस्त, फूड पॉइजनिंग, एलर्जी और लंबे समय में लीवर व किडनी खराब होने का खतरा रहता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी खतरनाक साबित हो सकता है।
आम लोगों की बढ़ी चिंता
रिपोर्ट सामने आने के बाद उपभोक्ताओं में डर और नाराजगी दोनों देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा के खाने की चीजें तक सुरक्षित नहीं रहीं। उपभोक्ताओं ने खाद्य विभाग से नियमित जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
तीन महीने बाद रिपोर्ट आने पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट समय पर आती, तो मिलावटखोरों पर पहले ही कार्रवाई हो सकती थी और लोगों को नुकसान से बचाया जा सकता था।
सख्ती के संकेत
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक मालवीय ने साफ किया है कि जिन दुकानदारों के सैंपल फेल हुए हैं, उनके खिलाफ एडीएम कोर्ट में वाद दाखिल किया जाएगा और दोष सिद्ध होने पर जुर्माने के साथ लाइसेंस निरस्त करने की भी कार्रवाई की जाएगी।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

