रीवा ज़िले के ढकरा सोंनौरी गांव में जन्मा दुर्लभ ‘कॉलोडीयोन बेबी’, डॉक्टरों की चौकाने वाली रिपोर्ट; ICU में जिंदगी की जंग जारी
रीवा (मध्य प्रदेश)। ज़िले के चाकघाट तहसील अंतर्गत ढकरा सोंनौरी गांव में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक महिला ने ऐसे नवजात को जन्म दिया, जिसकी स्थिति देखकर डॉक्टर भी हैरत में पड़ गए। नवजात की त्वचा पर मोटी परत और गहरी दरारें देखकर अस्पताल के डॉक्टरों ने तुरंत गंभीर स्थिति को समझते हुए बच्चे को रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल के ICU वार्ड में रेफर कर दिया, जहाँ फिलहाल उसका इलाज विशेषज्ञ टीम की देखरेख में जारी है।
कैसे हुआ मामला सामने?
जानकारी के मुताबिक, ढकरा सोंनौरी गांव की प्रियंका पटेल ने चाकघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सामान्य प्रसव से एक बच्चे को जन्म दिया। शुरू में सब सामान्य लगा, पर जैसे ही डॉक्टरों की नजर नवजात की त्वचा पर पड़ी, वे दंग रह गए। बच्चे के शरीर पर चमड़े जैसी मोटी परत थी, जिसमें कई जगह गहरी दरारें थीं। बच्चे की सांसें भी अनियमित थीं, जिससे उसकी हालत और गंभीर हो गई।
डॉक्टरों ने बिना देर किए उसे रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल रेफर कर दिया, जहाँ अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी देखभाल कर रही है।
क्या है कॉलोडीयोन बेबी सिंड्रोम?
गांधी मेमोरियल अस्पताल के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग के प्राध्यापक डॉ. करण जोशी के अनुसार, इस बच्चे को कॉलोडीयोन बेबी सिंड्रोम है। यह एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात त्वचा रोग है, जिसमें नवजात की त्वचा पर मोटी, चमकदार और कसी हुई झिल्ली जैसी परत बन जाती है।
इस परत के फटने पर त्वचा में गहरी दरारें पड़ती हैं, जिससे संक्रमण, शरीर का तापमान नियंत्रित न रह पाना और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी लाखों में किसी एक नवजात में पाई जाती है और साल भर में मुश्किल से दो-तीन ही केस सामने आते हैं।
बीमारी के कारण और जोखिम
डॉ. जोशी के मुताबिक, यह बीमारी जेनेटिक (वंशानुगत) और कभी-कभी नॉन-जेनेटिक कारणों से भी हो सकती है। अगर माता-पिता के जीन में कोई दोष हो, तो यह बीमारी बच्चे में आ सकती है।
बीमारी का सबसे बड़ा खतरा संक्रमण और शरीर की नमी का जल्दी खत्म होना है। त्वचा पर दरारें पड़ने से नवजात का शरीर जल्दी पानी खो देता है, जिससे हालत बिगड़ सकती है।
इलाज और विशेष देखभाल
गांधी मेमोरियल अस्पताल के पीडियाट्रिक्स और डर्मेटोलॉजी विभाग की संयुक्त टीम बच्चे का उपचार कर रही है। बच्चे की त्वचा को लगातार मॉइश्चराइज़ किया जा रहा है, ताकि दरारें कम हों और संक्रमण से बचा जा सके। ICU में उसकी सांस, दिल की धड़कन और शरीर के तापमान पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे बच्चों को विशेष वातावरण और निरंतर देखभाल की ज़रूरत होती है। अगर समय पर और सही इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।
परिवार और गांव की चिंता
प्रियंका पटेल के परिवार और गांव के लोगों के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी थी। अब वे बच्चे की सलामती के लिए लगातार दुआ कर रहे हैं।
गांव में भी लोग बच्चे के हालचाल की जानकारी लेने अस्पताल पहुंच रहे हैं और परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
डॉक्टरों की अपील
डॉक्टरों ने अपील की है कि यदि किसी नवजात में असामान्य त्वचा, झिल्ली जैसी परत या गहरी दरारें दिखाई दें, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें। घर पर किसी तरह के घरेलू उपाय या देसी दवाइयाँ न आजमाएँ, क्योंकि इससे नवजात की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
भारत क्रांति न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट
📌 #रीवा #CollodionBaby #RareDisease #मध्यप्रदेश #गांधी_मेमोरियल_अस्पताल #बाल_स्वास्थ्य #BharatKrantiNews
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.



