अपहरण की पटकथा: सुबह की सैर पर निकले रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी को बनाया निशाना, पुलिस की तेज़ कार्रवाई से सुरक्षित रिहाई
गोरखपुर – गोरखपुर के शाहपुर इलाके में रहने वाले रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी अशोक कुमार जायसवाल का शुक्रवार की सुबह अपहरण हो गया। बदमाशों ने पहले से रेकी कर रखी थी और जैसे ही वह रोज़ की तरह साइकिल से सैर पर निकले, उनका अपहरण कर लिया। फिरौती की मांग दो करोड़ रुपये की रखी गई, लेकिन पुलिस की सक्रियता से महज 12 घंटे में उन्हें सुरक्षित छुड़ा लिया गया। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और घटना में इस्तेमाल की गई कार भी बरामद कर ली है।
हर रोज़ साइकिल से जाते थे स्टेडियम
68 वर्षीय अशोक कुमार जायसवाल एयरफोर्स से रिटायर होने के बाद गोरखपुर के पादरी बाजार स्थित जेल बाईपास पर रहते हैं। वह रोज़ सुबह करीब 5:30 बजे सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम में साइकिल से जॉगिंग और स्विमिंग के लिए जाते थे। रोज़ की तरह शुक्रवार को भी वह घर से निकले थे, लेकिन लौटकर वापस नहीं आए।
कौवाबाग अंडरपास पर वारदात
पुलिस जांच में पता चला कि बदमाशों ने अशोक कुमार जायसवाल की दिनचर्या का पूरा ब्यौरा इकट्ठा किया था। जब वह कौवाबाग अंडरपास के पास पहुंचे, तो कार सवार बदमाशों ने रास्ता रोका। पहले कुछ देर उनसे सामान्य बातचीत की और फिर अचानक जबरन कार में बिठा लिया। सुबह का समय होने के कारण सड़क पर आवाजाही कम थी, जिससे किसी को शक तक नहीं हुआ।
शहर से लेकर अयोध्या तक घुमाया
अपहरण के बाद बदमाश अशोक को गाड़ी में बैठाकर गोरखपुर से बाहर ले गए और करीब चार घंटे तक घुमाते रहे। इस दौरान वह अयोध्या भी पहुंचे। इस सफर के दौरान बदमाश लगातार सोचते रहे कि फिरौती की रकम किस तरह वसूल की जाए। अशोक को धमकाकर कहा गया कि पत्नी से बातचीत के दौरान वह पुराने लेन-देन का जिक्र करें, ताकि अपहरण का कारण पैसे का विवाद दिखाया जा सके।
दो करोड़ की फिरौती की कॉल
करीब साढ़े दस बजे अशोक की पत्नी डॉ. सुषमा जायसवाल के फोन पर व्हाट्सएप कॉल आई, जिसमें दो करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई। सुषमा जायसवाल गोरखपुर से बाहर, बस्ती जिले के एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के पद पर तैनात हैं। कॉल आने के बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।
पुलिस की प्लानिंग और जाल
पुलिस ने अपहरणकर्ताओं की लोकेशन का पता लगाने के लिए रेलवे स्टेडियम से लेकर घर तक के रास्ते में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले और अशोक जायसवाल की कॉल डिटेल खंगाली। पुलिस ने अशोक की पत्नी को समझाया कि अगली कॉल आने पर बदमाशों को रुपये देने का झांसा दें, ताकि उनकी असली लोकेशन पता चल सके।
शाम को जब दोबारा कॉल आई, तो अशोक की पत्नी ने कहा कि वह रकम देने को तैयार हैं। बदमाशों ने रुपये लेने के लिए कालेसर जीरो प्वॉइंट पर बुलाया। पुलिस ने जीरो प्वॉइंट पर पहले से ही घेराबंदी कर रखी थी। जैसे ही आरोपी रुपये लेने पहुंचे, पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया और अशोक कुमार जायसवाल को सुरक्षित छुड़ा लिया।
आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार बदमाशों की पहचान सिकरीगंज थाना क्षेत्र के गुड्डु उर्फ श्याम सुंदर, जर्नादन गौड़ और बेलघाट क्षेत्र के करुणेश दूबे के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, ये सभी युवा हैं और पहले किसी बड़े अपराध में शामिल नहीं रहे हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इन्होंने अचानक इस तरह की बड़ी वारदात को क्यों अंजाम दिया।
कोई पुराना लेन-देन नहीं
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी स्पष्ट हो गया कि अशोक जायसवाल और अपहरणकर्ताओं के बीच कोई पुराना लेन-देन या रंजिश नहीं थी। बदमाशों ने सिर्फ पैसों के लिए इस अपहरण की साजिश रची थी। उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि मामला पुराने पैसे के विवाद से जुड़ा है, ताकि शक न हो।
प्रतिष्ठित परिवार और इलाके में हड़कंप
अशोक जायसवाल का परिवार गोरखपुर में एक प्रतिष्ठित परिवार माना जाता है। वह खुद आयुष्मान हॉस्पिटल के संचालक भी हैं, जो उनके मकान की दूसरी मंजिल पर चलता है। उनका बेटा अमेरिका में है और बेटी भी बाहर पढ़ाई कर रही है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल रहा, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से परिजनों और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली।
पुलिस ने दिखाई तत्परता
एसपी सिटी गोरखपुर ने बताया कि अपहरण की सूचना मिलते ही छह टीमों का गठन किया गया था। पूरे शहर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और टेक्निकल सर्विलांस के जरिए कॉल डिटेल की जांच की गई। पुलिस टीम की मुस्तैदी और योजना के चलते महज 12 घंटे में रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी को सुरक्षित वापस लाया गया और आरोपी भी सलाखों के पीछे पहुंच गए।
(भारत क्रांति न्यूज़ के लिए विशेष रिपोर्ट)
Author: Bharat Kranti News
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