सरकारी अस्पतालों में बिचौलियों पर कसेगा शिकंजा, पकड़ने के लिए बनी विशेष टीम

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सरकारी अस्पतालों में बिचौलियों पर कसेगा शिकंजा, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टॉफ की दो सदस्यीय टीम रखेगी नजर; पकड़ने पर सीधे पुलिस को सौंपेगी

ज्ञानपुर। जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को बिचौलियों के चंगुल से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। अब अस्पतालों में सक्रिय बिचौलियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टॉफ की दो सदस्यीय टीम तैनात की जाएगी। यह टीम अस्पताल परिसर में आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रखेगी। यदि कोई व्यक्ति मरीजों को गुमराह करते हुए या अस्पताल की व्यवस्था में हस्तक्षेप करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे सीधे पुलिस के हवाले किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अस्पतालों को बिचौलियों से मुक्त कराना और मरीजों को बिना किसी परेशानी के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तीन प्रमुख अस्पताल संचालित हैं। इनमें महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय भदोही और सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार तीनों अस्पतालों में प्रतिदिन करीब दो हजार से 2500 मरीजों की ओपीडी होती है। मरीजों की इसी भारी भीड़ के बीच बिचौलियों की सक्रियता अस्पताल प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। बताया जाता है कि एमबीएस और सौ शय्या अस्पताल की तुलना में एमसीएच अस्पताल में बिचौलियों का बोलबाला अधिक है।

पर्ची काउंटर से लेकर इमरजेंसी तक सक्रिय हैं बिचौलिये

अस्पताल परिसर में बिचौलियों का नेटवर्क कई महत्वपूर्ण स्थानों तक फैला हुआ है। पर्ची काउंटर, प्लास्टर कक्ष, एक्सरे कक्ष, इमरजेंसी और ओपीडी भवन जैसे स्थानों पर इनकी सक्रियता की शिकायतें मिलती रही हैं। अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को ये लोग अपने प्रभाव में लेने का प्रयास करते हैं। कई बार मरीजों को सही जानकारी के अभाव में इधर-उधर भटकना पड़ता है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने में भी परेशानी होती है।

बिचौलियों की सक्रियता का मामला नया नहीं है। अस्पताल प्रशासन पहले भी इन पर अंकुश लगाने के लिए कई प्रयास कर चुका है। करीब छह महीने पहले अस्पताल परिसर में जगह-जगह बड़े-बड़े अक्षरों में नोटिस चस्पा कराए गए थे। इन नोटिसों के माध्यम से मरीजों और उनके तीमारदारों को बिचौलियों से सावधान रहने की अपील की गई थी। साथ ही चिकित्सकों को भी ऐसे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अब तक किसी बिचौलिये को पकड़कर उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा सकी।

नोटिस और चेतावनी का नहीं हुआ असर

अस्पताल परिसर में बिचौलियों से सावधान रहने संबंधी नोटिस लगाए जाने के बाद उम्मीद थी कि उनकी गतिविधियों पर रोक लगेगी। लेकिन स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया। अस्पताल परिसर में बिचौलियों की आवाजाही जारी रहने की शिकायतें सामने आती रहीं। बताया जाता है कि कुछ ऐसे कर्मचारी भी दोबारा अस्पतालों में घूमते दिखाई देने लगे हैं, जिन्हें करीब छह महीने पहले अस्पताल से हटाया जा चुका था। आरोप है कि बिचौलिये जिम्मेदार अधिकारियों और चिकित्सकों के आसपास सक्रिय रहते हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की पूर्व में की गई कोशिशें अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं।

इससे सबसे अधिक परेशानी दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को उठानी पड़ती है। सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को बिचौलियों की गतिविधियों के कारण अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अस्पताल परिसर को बिचौलियों से मुक्त करना स्वास्थ्य विभाग के लिए जरूरी चुनौती बन गया है।

स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम ने दिए थे निर्देश

बिचौलियों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए गत दिनों आयोजित स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया था। उन्होंने बिचौलियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सीएमएस डॉ. धीरज प्रकाश को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया है। अब केवल नोटिस चस्पा करने और चिकित्सकों को मौखिक निर्देश देने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की टीम बनाई गई है।

नई व्यवस्था के तहत फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टॉफ के दो सदस्य अस्पताल परिसर में बिचौलियों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। टीम का काम संदिग्ध लोगों की पहचान करना और उनकी गतिविधियों की निगरानी करना होगा। यदि कोई व्यक्ति अस्पताल में बिचौलिये के रूप में सक्रिय पाया जाता है तो टीम उसे पकड़कर सीधे पुलिस के सुपुर्द करेगी। इससे अस्पताल परिसर में अनधिकृत रूप से घूमने वाले और मरीजों को प्रभावित करने वाले लोगों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकेगा।

मरीजों और चिकित्सकों के बीच नहीं होनी चाहिए बिचौलियों की जगह

एमसीएच के प्रभारी सीएमएस डॉ. धीरज प्रकाश ने बताया कि अस्पताल में बिचौलियों पर निगरानी रखने के लिए फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टॉफ की ड्यूटी लगाई गई है। टीम को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल परिसर में बिचौलियों की गतिविधियों पर नजर रखें और ऐसे लोगों को पकड़कर सीधे पुलिस के हवाले करें। उन्होंने कहा कि मरीजों और चिकित्सकों के बीच बिचौलियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से अस्पतालों में बिचौलियों की सक्रियता पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, पहले भी नोटिस चस्पा करने और निगरानी के निर्देश देने जैसी कोशिशें की जा चुकी हैं, लेकिन उनका खास असर नहीं दिखाई दिया। ऐसे में नई टीम कितनी सक्रियता से अपनी जिम्मेदारी निभाती है और बिचौलियों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी। मरीजों को राहत दिलाने के लिए जरूरी है कि निगरानी व्यवस्था लगातार जारी रहे और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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