बहू की हत्या के दोषी ससुर और ननद को उम्रकैद, अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
ज्ञानपुर। कोइरौना थाना क्षेत्र के दस्सूपुर गांव में दहेज प्रताड़ना के बाद विवाहिता की हत्या के बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश पुष्पा सिंह की अदालत ने शुक्रवार को ससुर भुल्लर और ननद कविता को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर ₹15-15 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोनों को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह मामला मई 2024 का है, जब कोइरौना थाना क्षेत्र के दस्सूपुर गांव में एक विवाहिता का शव उसके ससुराल स्थित कमरे में पंखे से लटका मिला था। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हुआ, लेकिन मृतका के मायके पक्ष ने दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाया। परिजनों का कहना था कि विवाहिता को लंबे समय से अतिरिक्त दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था तथा उसकी हत्या कर शव को फांसी पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोइरौना पुलिस ने 29 मई 2024 को मृतका के ससुर भुल्लर तथा दो ननदों कविता और रीतू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों का परीक्षण किया। विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि मृतका को दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाता था और उसकी मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई थी।
पुलिस जांच में ससुर भुल्लर और ननद कविता की भूमिका हत्या की घटना में स्पष्ट होने पर दोनों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया, जबकि अन्य आरोपित के संबंध में विवेचना के आधार पर अलग कार्रवाई की गई।
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह साबित किया कि विवाहिता की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश पुष्पा सिंह ने ससुर भुल्लर और ननद कविता को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड कानून के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने दोनों दोषियों पर ₹15-15 हजार का अर्थदंड भी लगाया। आदेश में कहा गया कि यदि निर्धारित समय में अर्थदंड जमा नहीं किया गया तो दोनों को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इस फैसले को दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराधों के विरुद्ध न्यायपालिका की सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अदालत के निर्णय से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है, वहीं यह फैसला समाज में दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कठोर संदेश भी देता है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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