जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने और गांवों के पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए पंचायत राज विभाग ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसके तहत जिले के छह ब्लॉकों में बदहाल पड़े 90 तालाबों का सुंदरीकरण कराया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक से 15-15 तालाबों की सूची मांगी गई है। ग्राम निधि से इन तालाबों की सफाई, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सूची मिलने के एक सप्ताह के भीतर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जिले में पहले से ही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से तालाबों के संरक्षण और सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है। अमृत सरोवर योजना के तहत अब तक करीब 250 से 300 तालाबों की मरम्मत और गहरीकरण कराया जा चुका है। इन तालाबों में जल संचयन क्षमता बढ़ाने के लिए तल की खुदाई कराई गई और आसपास की सफाई भी कराई गई थी।
इसके बावजूद कई गांवों में छोटे-छोटे तालाब और गड़ही अभी भी उपेक्षा का शिकार हैं। इन तालाबों में झाड़ियां उग आई हैं और गंदे पानी के आने से उनका अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। कई स्थानों पर अतिक्रमण भी बड़ी समस्या बन चुका है, जिससे तालाबों का क्षेत्रफल लगातार घट रहा है।
राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले की तीन तहसीलों के छह विकास खंडों में करीब 1250 से अधिक तालाब दर्ज हैं। इनमें से आधे से ज्यादा तालाब अतिक्रमण या उपेक्षा के कारण बदहाल स्थिति में हैं। बड़े तालाबों को तो अमृत सरोवर योजना में शामिल कर सुधार लिया गया है, लेकिन गांवों के बीच स्थित छोटे तालाब अब भी बदहाल हैं।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए पंचायत राज विभाग ने सभी ब्लॉकों के सचिवों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे तालाबों का चयन कर सूची तैयार करें जो लंबे समय से उपेक्षित हैं और जिनका पुनर्जीवन जरूरी है। हाल ही में जिला पंचायत राज अधिकारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सचिवों से छह ब्लॉकों के 90 तालाबों की सूची मांगी है।
सफाई, गहरीकरण और सुंदरीकरण होगा
चयनित तालाबों में सबसे पहले झाड़ियों और गाद की सफाई कराई जाएगी। इसके बाद तालाबों का गहरीकरण किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक वर्षा जल का संचयन हो सके। साथ ही तालाबों के किनारों को मजबूत किया जाएगा और जरूरत के अनुसार पौधरोपण एवं सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा। इससे न सिर्फ जल संरक्षण होगा बल्कि गांवों की सुंदरता भी बढ़ेगी।
जल संकट से निपटने में मिल सकेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि तालाबों के पुनर्जीवन से भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी। बरसात का पानी तालाबों में जमा होने से आसपास के हैंडपंप और कुओं में भी पानी का स्तर बेहतर बना रहेगा। इसके अलावा पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था और ग्रामीणों के दैनिक उपयोग के लिए भी यह तालाब उपयोगी साबित होंगे।
हर गांव में बनना है एक-एक अमृत सरोवर
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जल संरक्षण अभियान को गति देने के लिए शासन ने हर गांव में एक अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य रखा है। जिले के 546 गांवों में मनरेगा, राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग की धनराशि से अमृत सरोवर का निर्माण कराया जाना है।
साल 2022 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक करीब 250 से अधिक गांवों में अमृत सरोवर बनकर तैयार हो चुके हैं। हालांकि कई गांवों में अभी भी निर्माण कार्य अधूरा है। पंचायतों की धीमी प्रगति के कारण शेष सरोवरों के निर्माण में देरी हो रही है।
प्रशासन का कहना है कि लंबित कार्यों को जल्द पूरा कराने के लिए संबंधित अधिकारियों और ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि जल संरक्षण की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को मिल सके।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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