कफ सिरप कांड में ईडी की सबसे बड़ी कार्रवाई: वाराणसी में शुभम जायसवाल के दो ठिकानों पर छापा

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कफ सिरप कांड में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई: शुभम जायसवाल के दो ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, दिवेश जायसवाल का घर भी घिरा

वाराणसी। कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी कांड में आज शुक्रवार की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारी दबिश दी। एक साथ छह शहरों—लखनऊ, वाराणसी, अहमदाबाद, जौनपुर, सहारनपुर और रांची—में टीमों ने 25 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई सिंडीकेट के वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के पैटर्न का पता लगाने के लिए की गई है।


वाराणसी में तेजी से बदली स्थिति: शुभम जायसवाल के घर-दफ्तर पर छापे

वाराणसी में ईडी की दो टीमों ने 25 हजार रुपये के इनामी तस्कर शुभम जायसवाल के दो ठिकानों को निशाने पर लिया। टीम सुबह से ही घर और उसके व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में प्रवेश कर दस्तावेज, मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है।

छापेमारी की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान जल्दी खोल लिए और आसपास भीड़ इकट्ठी हो गई, हालांकि पुलिस ने मौके पर किसी भी तरह की अफरा-तफरी नहीं होने दी।


खोजवा में दिवेश जायसवाल का घर भी ईडी की रडार पर

वाराणसी के खोजवा क्षेत्र में भी ईडी की एक टीम ने दिवेश जायसवाल के आवास पर छापा मारा। शुरुआती इनपुट के अनुसार दिवेश जायसवाल के मोबाइल डेटा और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है कि कहीं उसका भी सप्लाई चैन से जुड़ाव तो नहीं।

आसपास के लोगों ने बताया कि अचानक पहुंचे ईडी अधिकारियों से कॉलोनी में तनाव का माहौल बना, मगर पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से जारी है।


कफ सिरप का अवैध व्यापार – कैसे चल रहा था पूरा खेल?

एसटीएफ ने इस मामले का भंडाफोड़ तब किया जब सहारनपुर से अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा को पकड़ा गया। पूछताछ में जिस नेटवर्क का खुलासा हुआ, वह पूरा सिंडीकेट बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था।

पूछताछ में सामने आए मुख्य तथ्य

  • गिरफ्तार दोनों आरोपी विशाल राणा और विभोर राणा के लिए काम करते थे

  • दोनों राणा बंधु और शुभम जायसवाल मिलकर कफ सिरप तस्करी का नेटवर्क संचालित करते थे

  • फर्जी ई-वे बिल बनाकर सिरप को बंगाल, हरियाणा और अन्य राज्यों में भेजा जाता था

  • माल को वाराणसी, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर और आगरा जैसे बड़े शहरों से ट्रांजिट कराया जाता था

  • नेटवर्क में सप्लाई से लेकर ट्रांसपोर्ट और नकली दस्तावेजों का पूरा सिस्टम तैयार किया गया था


 सुपर स्टॉकिस्ट लाइसेंस ने शुभम की ताकत बढ़ाई

जांच में यह बात भी सामने आई कि शुभम जायसवाल ने अपने पिता भोला जायसवाल के नाम से रांची में एबॉट कंपनी का सुपर स्टॉकिस्ट लाइसेंस हासिल कर लिया था।
यही लाइसेंस उसके लिए ‘कानूनी ढाल’ बन गया। इसके बाद—

  • अवैध कफ सिरप को कानूनी दवाओं की शिपमेंट जैसा दिखाया जाने लगा

  • बड़ी खेपें राज्य सीमा पार से बिना रोक-टोक भेजी जाने लगीं

  • सप्लाई चेन पहले से कई गुना मजबूत हो गई

  • रांची से यूपी और हरियाणा रूट पर सबसे ज्यादा खेपें भेजी गईं

एसटीएफ को शक है कि इस नेटवर्क के जरिए कई करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किया गया है।


 ईडी की कार्रवाई का उद्देश्य: मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धारा की जांच

ईडी की टीमें इस छापेमारी में खास तौर पर इन पहलुओं पर फोकस कर रही हैं—

  • अवैध कमाई को कहां और कैसे निवेश किया गया?

  • क्या दवा कंपनियों या सप्लाई चैन में किसी अधिकारी की मिलीभगत है?

  • किन-किन बैंकों से संदिग्ध लेनदेन हुए?

  • फर्जी ई-वे बिल और चालान तैयार करने में किसका हाथ है?

  • रांची और यूपी के बीच दवा सप्लाई का कागजी खेल कैसे तैयार किया गया?

ईडी जल्द ही इस केस में पहली अटैचमेंट कार्रवाई भी कर सकती है।


 लोकल और इंटरस्टेट नेटवर्क दोनों पर नज़र

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल यूपी तक सीमित नहीं है बल्कि—

  • झारखंड

  • बिहार

  • पश्चिम बंगाल

  • हरियाणा

  • दिल्ली-एनसीआर

तक इसकी जड़ें हो सकती हैं। छापेमारी के बाद और गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।

Ashu Jha : Bharat Kranti News
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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