निजी स्कूलों में सात वर्षों में 40 गुना बढ़ा प्रवेश — सरकारी स्कूलों से बढ़ी दूरी, अभिभावक कर रहे निजी शिक्षा पर भरोसा
1 दिसंबर से आरटीई के तहत नए सत्र के प्रवेश आवेदन शुरू
ज्ञानपुर। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी विद्यालयों में बच्चों का प्रवेश तेजी से बढ़ रहा है, जो समाज में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और अभिभावकों के बदलते रुझान को दर्शाता है। वर्ष 2019-20 में आरटीई में केवल 74 बच्चों ने प्रवेश लिया था, जबकि 2025-26 शिक्षा सत्र में यह संख्या बढ़कर 2730 पहुंच गई, जो मात्र सात वर्षों में 40 गुना वृद्धि का बड़ा संकेत है।
आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। सरकार ऐसे बच्चों की ट्यूशन फीस से लेकर कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और अध्ययन सामग्री तक की संपूर्ण जिम्मेदारी वहन करती है।
अभिभावकों की बढ़ती रुचि — कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार निजी विद्यालयों में प्रवेश बढ़ने के तीन प्रमुख कारण सामने आए हैं—
🔹 अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई
🔹 स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, खेल व को-करीकुलर गतिविधियाँ
🔹 निजी स्कूलों में अनुशासन एवं शिक्षा का परिणाम बेहतर होना
इसके विपरीत सरकारी विद्यालयों में पर्याप्त संसाधन, शिक्षकों की उपलब्धता और गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं, जिससे अभिभावकों का रुझान तेजी से निजी विद्यालयों की ओर बढ़ा है।
आवेदन ज्यादा, सीटें कम — लॉटरी सिस्टम बना मजबूरी
2025 में प्रवेश के लिए 5000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जबकि अंतिम प्रवेश 2730 तक सीमित रहा। इससे यह स्पष्ट है कि निजी विद्यालयों में सीटें सीमित होने के कारण लॉटरी सिस्टम के बिना प्रवेश देना संभव नहीं रह गया है।
परिणामस्वरूप कई अभिभावक बच्चों के नाम न आने पर निराश लौटते हैं, जबकि कुछ को दूसरे चरण की लॉटरी पर निर्भर रहना पड़ता है।
आरटीई प्रवेश — वर्षवार आंकड़े
| वर्ष | निजी विद्यालयों में प्रवेश |
|---|---|
| 2019-20 | 74 |
| 2020-21 | 157 |
| 2021-22 | 609 |
| 2022-23 | 839 |
| 2023-24 | 1360 |
| 2024-25 | 1485 |
| 2025-26 | 2730 |
➡️ पिछले तीन वर्षों में प्रवेश लगभग दोगुना बढ़ा है
अभिभावकों की प्रतिक्रिया
कुछ अभिभावकों ने बताया —
“सरकारी स्कूलों में पढ़ाई सही होती तो हमें निजी स्कूलों का रुख नहीं करना पड़ता।”
“आरटीई योजना गरीब परिवारों का सहारा बनी है, वरना निजी शिक्षा हमारी पहुंच से बाहर थी।”
विभाग का वर्जन
“आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। प्रचार-प्रसार और जागरूकता बढ़ने से प्रवेश में तेजी आई है। आगे भी इस योजना को सुचारू रखने के पूरे प्रयास होंगे।”
— शिवम पांडेय, बीएसए
महत्वपूर्ण सूचना अभिभावकों के लिए
शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए आवेदन 1 दिसंबर से शुरू
आवेदन केवल ऑनलाइन मोड से किया जाएगा
दस्तावेज़ — जन्म प्रमाण पत्र, आधार, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र आदि आवश्यक
देर से आवेदन करने पर सीट मिलने की संभावना कम हो जाती है
निष्कर्ष
एक ओर जहां सरकारी विद्यालयों में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा, वहीं निजी विद्यालयों की पढ़ाई को लेकर अभिभावकों की आशा और भरोसा बढ़ रहा है।
आरटीई योजना गरीब परिवारों के लिए शिक्षा का मजबूत साधन बनकर उभर रही है, लेकिन बढ़ती मांग के मद्देनज़र सीटों का विस्तार और गुणवत्ता निगरानी भविष्य की बड़ी आवश्यकता होगी।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।



