द्वारका में ‘कुटुंब प्रबोधन, प्राणायाम एवं ध्यान’ पर भव्य परिचर्चा सम्पन्न — विशेषज्ञों ने दी जीवनशैली व पारिवारिक मूल्यों पर महत्वपूर्ण सीख
द्वारका, नई दिल्ली | 17 नवंबर 2025
आधुनिक भागदौड़ भरे जीवन में परिवार, स्वास्थ्य और मानसिक शांति की महत्ता को रेखांकित करने के उद्देश्य से विश्व आयुर्वेद परिषद, दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली विभाग द्वारा “कुटुंब प्रबोधन, प्राणायाम एवं ध्यान” विषय पर एक बहुआयामी एवं ज्ञानवर्धक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम रविवार, 16 नवंबर को स्वामी वैद्यशाला, देवकुंज, एफ-11/1, द्वारका में आयोजित हुआ, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से आए परिवारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
स्वस्थ कुटुंब—स्वस्थ समाज की संकल्पना पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं विश्व आयुर्वेद परिषद, दिल्ली प्रांत की महासचिव डॉ. संघमित्रा दास ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि परिवार के प्रत्येक सदस्य की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति ही एक स्वस्थ समाज की नींव रखती है। उन्होंने कहा—
“कुटुंब केवल सामाजिक इकाई नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, संस्कार और सामूहिक उन्नति की आधारशिला है।”
उन्होंने आयुर्वेदिक जीवनशैली में नींद, आहार-विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या और व्यायाम के महत्व को सरल भाषा में समझाया।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज के समय में परिवारों में संवाद की कमी बढ़ती जा रही है, जिसे योग-ध्यान व सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से सुधारा जा सकता है।
प्राणायाम एवं ध्यान से पारिवारिक वातावरण में संतुलन
योगाचार्य राज कुमार शर्मा ने प्राणायाम की वैज्ञानिक पद्धतियों पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि—
“प्राणायाम केवल सांसों का अभ्यास नहीं, बल्कि भावनाओं, विचारों और पारिवारिक रिश्तों में सामंजस्य लाने का माध्यम है।”
उन्होंने उपस्थित लोगों को विभिन्न प्राणायामों का व्यावहारिक अभ्यास कराते हुए बताया कि घर में प्रतिदिन कुछ मिनट का सामूहिक योग-अभ्यास परिवार में सकारात्मक ऊर्जा स्थापित करता है।
उनके सत्र के दौरान प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखा गया।
संयुक्त परिवार—संस्कारों का जीवंत विश्वविद्यालय
विश्व गीता संस्थान के संस्थापक आचार्य राधा कृष्ण मनोड़ी ने पारिवारिक मूल्यों और संयुक्त परिवार की अवधारणा को भारतीय संस्कृति की धरोहर बताया।
उन्होंने कहा—
“संयुक्त परिवार में रहने वाला बच्चा जीवन की शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि अपनत्व, जिम्मेदारी और अनुशासन के माध्यम से सीखता है।”
उन्होंने गीता के प्रसंगों के माध्यम से बताया कि कुटुंब प्रबोधन में धैर्य, श्रद्धा और परस्पर सहयोग का कितना महत्व है।
कविताओं से सजी सांस्कृतिक छटा
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवियित्री श्रीमती तुषा शर्मा ने अपनी सुमधुर कविताओं से कार्यक्रम में अद्भुत साहित्यिक और भावनात्मक वातावरण निर्मित किया।
उनकी रचनाओं में परिवार, संबंध, संस्कार और मानवता के मूल्य झलकते रहे।
उपस्थित लोग उनकी प्रस्तुति से बेहद प्रभावित हुए।
टेक्नोलॉजी बनाम पारिवारिक मूल्य — विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. विनय कुमार ने आधुनिक परिवारों में तकनीक की बढ़ती निर्भरता पर चिंता जाहिर की।
उन्होंने कहा—
“मोबाइल और इंटरनेट उपयोग सुविधा है, लेकिन जब यह संवाद का स्थान ले लेता है, तब परिवार तूटने लगते हैं।”
उन्होंने डिजिटल उपयोग की मर्यादा तय करने और परिवार में ‘नो-गैजेट टाइम’ लागू करने जैसे उपाय सुझाए।
सम्मान-सम्मान एवं आभार व्यक्त
स्वामी वैद्यशाला के संस्थापक डॉ. स्वामी नाथ मिश्रा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत और धन्यवाद करते हुए कहा—
“स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन का निर्माण परिवार से ही होता है। ऐसी परिचर्चाएं समाज के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।”
कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. शिवानी मिश्रा पांडेय ने कुमारी कोमल और कुमारी दीपिका के सहयोग से अतिथियों को अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न और उपहार भेंटकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का प्रारंभ और समापन वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम में दर्ज हुई गणमान्य उपस्थितियाँ
इस अवसर पर—
डॉ. महेश कुमार, डॉ. हरकिशन पवार, डॉ. कमलेश, डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. विजय कौशिक,
डॉ. योगेश कुमार पांडेय, डॉ. सुनैना शर्मा, डॉ. हिमांशु शेखर तिवारी,
योगाचार्य दीपक सहगल, श्री वी. एन. गाबा, श्री राजनाथ पांडेय, श्री राजेश वत्स,
श्री रणजीत सिंह, श्री ज्ञानेश्वर (ज्ञानी), श्री दिलीप मिश्रा,
योगाचार्य अभिषेक मिश्रा, श्रीमती स्वाति मिश्रा कालाचार्य,
श्री सुनील कुमार सिंघल, पंडित अजय शास्त्री, श्री शाश्वत सिंह,
श्री महेंद्र चौहान, श्री प्रखर अग्रवाल
सहित अनेक विशिष्ट व्यक्तियों ने उपस्थिति दर्ज की।
सार — स्वस्थ कुटुंब ही स्वस्थ समाज की नींव
यह परिचर्चा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवार, संस्कृति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक संतुलन के महत्व को पुनः स्थापित करने का एक सार्थक प्रयास थी।
उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से ऐसे कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित करने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

