देहरादून की हवा सीमा रेखा पर: घंटाघर और नेहरू कॉलोनी में वायु प्रदूषण बढ़ा

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देहरादून की हवा सीमा रेखा पर: घंटाघर और नेहरू कॉलोनी में बढ़ा वायु प्रदूषण

देहरादून, उत्तराखंड: देहरादून में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। दून विश्वविद्यालय क्षेत्र के आंकड़े हमेशा सुरक्षित दिखाते रहे हैं, लेकिन शहर के व्यस्त और रिहायशी क्षेत्रों घंटाघर और नेहरू कॉलोनी में हवा की गुणवत्ता अब “सीमा रेखा” पर खड़ी है।

उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दीपावली पर नागरिकों से विशेष अपील की है कि पटाखों का प्रयोग कम करें और केवल ग्रीन पटाखों का उपयोग करें, ताकि प्रदूषण का स्तर नियंत्रित रहे।


शहर के विभिन्न क्षेत्रों में AQI का हाल

शहर में डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर अक्सर दून विश्वविद्यालय क्षेत्र का AQI ही दिखाया जाता है। गुरुवार को कारगी चौक पर AQI 49 दर्ज हुआ था, जो “सुरक्षित” श्रेणी में आता है।

लेकिन थर्ड पार्टी जांच में सामने आया कि घंटाघर और नेहरू कॉलोनी में AQI लगातार 100 से ऊपर है। इसका मतलब है कि हवा की गुणवत्ता सीमा रेखा पर खड़ी है और मध्यम से बुरी स्थिति की ओर बढ़ रही है।


13-15 अक्टूबर के AQI आंकड़े

स्थान 13 अक्टूबर 14 अक्टूबर 15 अक्टूबर
घंटाघर 113 106 120
नेहरू कॉलोनी 95 98 102

AQI श्रेणियाँ:

  • 0–50 : अच्छा

  • 51–100 : संतोषजनक

  • 101–200 : मध्यम

  • 201–300 : बुरी

  • 301–400 : बहुत बुरी

  • 401 और अधिक : अति गंभीर


दीपावली के समय खतरा

देहरादून कटोरेनुमा घाटी में बसा होने के कारण वायु प्रदूषण लंबे समय तक स्थिर रहता है। दीपावली पर पटाखों से प्रदूषण बढ़ने पर हवा में सुधार आने में कई दिन लग सकते हैं।

विशेषकर बुजुर्ग, बच्चों और श्वास रोगियों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल ने कहा,

“दीपावली पर हवा की गुणवत्ता नियंत्रित रखने के लिए नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। पटाखों का कम इस्तेमाल और ग्रीन पटाखों का उपयोग हमारी मुख्य सलाह है।”


पिछले वर्षों में दीपावली का AQI रिकॉर्ड

वर्ष घंटाघर नेहरू कॉलोनी ऋषिकेश
2024 288 243 173
2023 333 349 196
2022 252 242 236
2021 248 306 257
2020 317 198

विशेषज्ञों का कहना है कि व्यक्तिगत और प्रशासनिक कदम दोनों जरूरी हैं।


नागरिकों के लिए सुझाव

  • दीपावली में पटाखों का प्रयोग सीमित करें

  • केवल ग्रीन पटाखों का उपयोग करें

  • बुजुर्ग, बच्चे और श्वास रोगियों को प्रदूषण वाले क्षेत्रों में कम रखें

  • घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें

  • मास्क पहनें और ज्यादा खुले वातावरण में समय बिताने से बचें


विशेषज्ञों की राय

  • डॉ. सुमित शर्मा, फिजिशियन: “दून की घाटी में वायु प्रदूषण लंबे समय तक रह सकता है। मध्यम और बुजुर्ग वर्ग के लोग विशेष सावधानी रखें।”

  • पर्यावरण वैज्ञानिक, आरती भट्ट: “स्थानीय प्रशासन और नागरिक दोनों की सतर्कता जरूरी है। ग्रीन पटाखे और कम पटाखों का प्रयोग प्रदूषण को नियंत्रित कर सकता है।”

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Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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