UP पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल: चोरी के आरोपी की जगह जज को पकड़ने पहुंची पुलिस, रिपोर्ट में भी बताया ‘ग़ायब’!
Bharat Kranti News | फिरोजाबाद | 14 अप्रैल 2025
उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। फिरोजाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दारोगा ने अपनी ड्यूटी को इस तरह अंजाम दिया कि उसने कानून के पूरे ढांचे की गरिमा को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।
चोरी के मामले में वारंट हुआ था जारी
मामला जिले के एक चर्चित चोरी केस से जुड़ा है, जिसमें राजकुमार उर्फ पप्पू नामक व्यक्ति को आरोपी बनाया गया था। इस केस की सुनवाई फिरोजाबाद कोर्ट में चल रही है। केस की गंभीरता को देखते हुए अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नगमा खान ने आरोपी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
वारंट लेकर पहुंचे आरोपी के पते पर, लेकिन ढूंढने लगे जज को
वारंट तामील करने पहुंचे संबंधित दारोगा ने आरोपी के पते पर जाकर ऐसा कारनामा कर दिया जिसे सुनकर पूरा न्यायिक महकमा स्तब्ध रह गया। दरअसल, दारोगा ने वारंट पर दर्ज नाम “नगमा खान” को ही आरोपी मान लिया और राजकुमार उर्फ पप्पू की जगह जज नगमा खान को ही तलाशने लगा।
पुलिसकर्मी ने आरोपी के पते पर जाकर पड़ोसियों से पूछताछ की और जब “नगमा खान” वहां नहीं मिलीं, तो उसने एक रिपोर्ट तैयार की और 23 मार्च को कोर्ट में दाखिल कर दी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि “आरोपी नगमा खान अपने घर पर नहीं पाई गईं।”
कोर्ट में हड़कंप, जज ने जताई कड़ी आपत्ति
जब यह रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत हुई, तो जज नगमा खान स्वयं हैरान रह गईं। उन्होंने रिपोर्ट को पढ़ने के बाद कड़ा ऐतराज जताया और इसे ‘गंभीर प्रशासनिक लापरवाही’ करार दिया।
उन्होंने तुरंत इस मामले की शिकायत आईजी रेंज आगरा दीपक कुमार और एसपी सौरभ दीक्षित से की। इसके बाद पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए और संबंधित दारोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
न्यायिक गरिमा पर सीधा प्रहार
इस घटना ने न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। जब एक दारोगा आरोपी और जज के बीच अंतर नहीं समझ पाता और उसकी गलती से न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचती है, तो यह केवल एक गलती नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।
प्रशासन ने जताई नाराजगी, डीआईजी ने मांगी रिपोर्ट
सूत्रों की मानें तो डीआईजी स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित पुलिस अधिकारियों से 48 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह भी माना जा रहा है कि दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
???? ऐसे मामलों से कैसे सुधरेगी पुलिस की छवि?
पुलिस पर जनता का विश्वास तभी कायम रह सकता है जब वह अपनी जिम्मेदारियों को समझदारी और संवेदनशीलता से निभाए। ऐसे मामलों से जहां जनता का भरोसा डगमगाता है, वहीं न्याय व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
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????️ रिपोर्ट: भारत क्रांति न्यूज़ ब्यूरो, फिरोजाबाद
✍️ संपादन: शिव शंकर दुबे, चीफ एडिटर
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.
