गोल्डन पीरियड में सिस्टम फेल: 25 मिनट तक धक्का खाते रहे घायल, नहीं चली एंबुलेंस

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सिस्टम फेल, सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था

जिला अस्पताल ज्ञानपुर में हुई यह घटना केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस समय घायल युवक को तत्काल उन्नत चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता थी, उसी समय एंबुलेंस का स्टार्ट न होना सिस्टम की लापरवाही को उजागर करता है।

गोल्डन पीरियड में गंवाया गया कीमती समय

दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती 20 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में गोल्डन पीरियड कहा जाता है। इसी समय में यदि मरीज को ट्रॉमा सेंटर पहुंचा दिया जाए तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

लेकिन जिला अस्पताल में एंबुलेंस खराब होने के कारण घायल विनोद को लगभग 25 मिनट तक एंबुलेंस में ही इंतजार करना पड़ा। इस दौरान न तो वैकल्पिक व्यवस्था पहले से तैयार थी और न ही एंबुलेंस की तकनीकी स्थिति की जांच की गई थी।

मौके पर मची अफरा-तफरी

एंबुलेंस के स्टार्ट न होने से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिसकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी और मौजूद लोग मिलकर एंबुलेंस को धक्का देते रहे। परिजन बदहवास हालत में इलाज की गुहार लगाते रहे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि समय रहते दूसरी एंबुलेंस बुला ली जाती तो घायल को समय से वाराणसी भेजा जा सकता था।

मेंटीनेंस सिर्फ कागजों तक सीमित

सूत्रों की मानें तो जिले में एंबुलेंसों की नियमित जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।

  • फाइलों में सर्विस पूरी दिखाई जाती है

  • वास्तविक ग्राउंड चेक नहीं होता

  • खराब एंबुलेंस को भी ड्यूटी पर लगा दिया जाता है

  • जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचते

यही कारण है कि गंभीर मरीजों के लिए बनी जीवन रक्षक एंबुलेंस खुद मरीजों के लिए खतरा बनती जा रही है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

घटना के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते एंबुलेंस चालू हो जाती तो घायल को बेहतर इलाज मिल सकता था।

लोगों ने मांग की है कि

  • जिले की सभी एंबुलेंसों की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए

  • खराब एंबुलेंसों को सेवा से हटाया जाए

  • जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

सीएमओ द्वारा संबंधित एजेंसी को नोटिस भेजे जाने की बात कही गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ नोटिस से व्यवस्था सुधरेगी या जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होगी।

अब देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही के बाद स्वास्थ्य विभाग महज कागजी कार्रवाई करता है या भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाता है।

Ashu Jha : Bharat Kranti News
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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