42 साल बाद खत्म हुआ जमीन विवाद, अदालत ने वादी के पक्ष में सुनाया फैसला
ज्ञानपुर। न्यायिक प्रक्रिया के लंबे इंतजार के बाद 42 वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद का आखिरकार निपटारा हो गया। सिविल जज जूनियर डिवीजन बलराम पंवार की अदालत ने दीवानी वाद में फैसला सुनाते हुए वादी के पक्ष में निर्णय दिया और प्रतिवादी को जमीन का बैनामा करने का आदेश दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भूमि से संबंधित इकरारनामा पूरी तरह वैध है और उसी के आधार पर वादी को उसका अधिकार मिलना चाहिए। कोर्ट ने प्रतिवादी को निर्देशित किया कि वह दो माह के भीतर 24 अप्रैल 1980 के सर्किल रेट के अनुसार जमीन का बैनामा वादी के पक्ष में करे।
मामला भदोही कोतवाली क्षेत्र के सनवैया, असनांव निवासी अनंता (मृतक) से जुड़ा है। अनंता ने वर्ष 1980 में जौनपुर जिले के मड़ियाहूं थाना क्षेत्र के राईपुर गांव निवासी नन्हकू राम (मृतक) से राईपुर गांव में स्थित 17.5 बिस्वा भूमि 5,250 रुपये में खरीदने का इकरारनामा कराया था। इसके बावजूद जमीन का बैनामा नहीं किया गया, जिसके चलते अनंता ने उसी वर्ष न्यायालय की शरण ली थी।
मुकदमे की लंबी अवधि के दौरान दोनों मूल पक्षकारों का निधन हो गया। इसके बाद वादी की ओर से उनकी पुत्री राजकुमारी और प्रतिवादी की ओर से नन्हकू राम की पत्नी ब्रह्मदेई ने मुकदमे की पैरवी की। वादी पक्ष ने अदालत में कहा कि इकरारनामा के बावजूद प्रतिवादी पक्ष जानबूझकर बैनामा टालता रहा, जिससे विवाद दशकों तक चलता रहा।
सिविल जज जूनियर डिवीजन बलराम पंवार ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा कि इकरारनामे के अनुसार भूमि का स्वामित्व वादी को दिया जाना न्यायसंगत है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा में बैनामा नहीं होने की स्थिति में वादी को आगे कानूनी विकल्प अपनाने का अधिकार रहेगा।
इस फैसले से न सिर्फ वादी पक्ष को राहत मिली है, बल्कि यह निर्णय वर्षों से लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर न्यायपालिका की गंभीरता को भी दर्शाता है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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