जिंदा जले 13 लोग, 100 से ज्यादा घायल: यमुना एक्सप्रेस-वे हादसे की इनसाइड स्टोरी
मथुरा। यमुना एक्सप्रेस-वे के माइलस्टोन 127 पर मंगलवार तड़के घने कोहरे के बीच हुए भीषण सड़क हादसे में 13 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक यात्री घायल हो गए। घायलों में अधिकांश को सिर, हाथ, पैर, कंधे में गंभीर चोटें आई हैं और करीब 100 लोगों की हड्डियां टूटने की पुष्टि हुई है।
कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह करीब पौने चार बजे दृश्यता लगभग शून्य थी। सबसे पहले एक अर्टिगा कार स्विफ्ट डिजायर से टकरा गई। टक्कर के बाद दोनों कारों के चालक सड़क पर ही रुककर बहस करने लगे। इसी दौरान तीसरी ब्रेजा कार भी आकर टकरा गई। इसके बाद टेंपो ट्रेवलर और फिर एक के बाद एक बसों की टक्कर से घटनाक्रम भयावह हो गया।
आग लगी, नहीं निकल पाए यात्री
टक्करों के बाद आग भड़क उठी और अफरा-तफरी मच गई। बसों में मौजूद यात्रियों ने बाहर निकलने के लिए आपातकालीन खिड़कियों का सहारा लेना चाहा, लेकिन खिड़कियां छोटी और ऊंचाई पर होने के कारण लोग बाहर नहीं निकल सके। आग तेजी से फैलती गई। बाद में खिड़कियों के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला गया।
400 से अधिक यात्री थे सवार
हादसे के समय सात स्लीपर बसें थीं, जिनमें सीटें पूरी तरह भरी हुई थीं। कुल मिलाकर करीब 400 से अधिक यात्री सवार थे। बसों में सामान भी रखा हुआ था। तड़के का वक्त होने के कारण अधिकतर यात्री सो रहे थे, जिससे उन्हें संभलने का मौका नहीं मिल सका।
70 मीटर तक फैली आग
हादसे में आंबेडकर नगर डिपो की रोडवेज बस, सात डबल डेकर बसें और एक ब्रेजा कार आग की चपेट में आ गईं। आग इतनी भीषण थी कि करीब 70 मीटर तक एक्सप्रेस-वे पर फैल गई। 10 मीटर के दायरे में मौजूद वाहन और सामान जलकर राख हो गए।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद एडीजी आगरा जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि हादसा तड़के 4:30 बजे हुआ। प्रारंभिक जांच में दो लोगों की बहस को हादसे का कारण माना गया है। सूचना मिलते ही पुलिस की तीन पीआरवी क्रमशः 6, 9 और 13 मिनट में मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद थाना प्रभारी और दमकल की गाड़ियां भी पहुंचीं और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
पांच घंटे बंद रहा एक्सप्रेस-वे
हादसे के बाद आगरा से दिल्ली की ओर जाने वाली यमुना एक्सप्रेस-वे की एक लेन करीब पांच घंटे तक बंद रही। यातायात पुलिस ने रूट डायवर्जन कर वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकाला। सुबह 4:30 बजे से 8:30 बजे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जले और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाया गया, तब जाकर यातायात बहाल हो सका।
घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
- घने कोहरे में यमुना एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा
- 13 लोगों की जिंदा जलकर मौत, 100 से अधिक घायल
- आपातकालीन खिड़कियां छोटी होने से फंसे रहे यात्री
- 7 स्लीपर बसें, रोडवेज बस और कारें आग की चपेट में
- करीब 70 मीटर तक एक्सप्रेस-वे पर फैली आग
- आगरा-दिल्ली लेन 5 घंटे तक रही बंद
प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती
हादसे के चश्मदीदों ने बताया कि टक्कर के तुरंत बाद आग की लपटें उठने लगीं। कुछ ही सेकंड में बसों के अंदर धुआं भर गया। लोग चीख-पुकार करते हुए बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, लेकिन आपातकालीन खिड़कियों से निकलना मुश्किल था। कई यात्रियों को शीशे तोड़कर बाहर निकाला गया।
राहत एवं बचाव अभियान
मथुरा, आगरा और आसपास के जिलों से दमकल और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब पांच घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने यात्रियों का बिखरा सामान सुरक्षित स्थान पर एकत्र कराया।
प्रशासन का बयान
एडीजी आगरा जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ के अनुसार, प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह घना कोहरा और सड़क पर दो चालकों के बीच हुई बहस मानी जा रही है। पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
- क्या स्लीपर बसों की आपातकालीन खिड़कियां मानक के अनुरूप हैं?
- कोहरे में एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक नियंत्रण के क्या इंतजाम थे?
- बड़े हादसों से सबक लेकर क्या नियमों में बदलाव होगा?
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।


