यूपी में तीन करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की तैयारी: चुनाव आयोग ने पुनः सत्यापन का आदेश दिया
मतदाता सूची में असंगतियों पर आयोग सख्त, SIR की बड़ी समीक्षा — बीएलओ और बीएलए की संयुक्त कार्रवाई 12 दिसंबर तक अनिवार्य
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से हटाए जाने वाले नामों की संख्या करीब तीन करोड़ तक पहुंच सकती है। यह संख्या अपने आप में इतनी बड़ी है कि केरल जैसे पूरे राज्य के कुल मतदाताओं से भी अधिक है। इस पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने यूपी के सभी जिलों में दोबारा जांच (Re-Verification) के आदेश जारी किए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) यूपी, नवदीप रिणवा ने बताया कि मंगलवार को वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश के सभी मंडलायुक्त (camisnear), जिला निर्वाचन अधिकारी, रोल प्रेक्षक और विशेष रोल प्रेक्षक शामिल हुए।
क्यों बढ़ी चिंता? 18.48% मतदाता ‘असंग्रहीत’ पाए गए
यूपी में 15.44 करोड़ मतदाताओं के गणना प्रपत्रों (Enumeration Forms) का 98.14% डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। डिजिटाइज्ड प्रपत्रों में:
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79.95% प्रपत्र — मतदाता या परिवार के सदस्य के हस्ताक्षर वाले
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18.48% प्रपत्र — असंग्रहीत (मृतक, बाहर गए, अनुपस्थित, डुप्लीकेट वोटर) के रूप में चिह्नित
आयोग ने इस 18.48% के आंकड़े को अत्यधिक और संदिग्ध माना है। इसलिए सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:
मृतक मतदाताओं
स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोग
अनुपस्थित मिलने वाले लोगों
दो जगह नाम वाले (Dual Entry) मतदाता
इन सबकी दोबारा फिजिकल जांच की जाए।
बीएलओ–बीएलए वेरिफिकेशन अब अनिवार्य
जिन मतदान केंद्रों पर SIR का काम पूरा हो चुका है, वहां:
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बीएलओ को अपने बूथ की असंग्रहीत मतदाताओं की सूची
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मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए (BLA) को उपलब्ध करवानी होगी।
साथ ही:
➤ 12 दिसंबर तक सभी बूथों पर बीएलओ–बीएलए की बैठक कराना अनिवार्य
इसका उद्देश्य है—किसी वोटर को गलत श्रेणी में डालने की गलती न हो।
2003 की सूची से मैपिंग अभी भी अपूर्ण — केवल 72.90% पूरा
मतदाताओं की पहचान को मजबूत बनाने के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची से भी मैपिंग की जा रही है।
अब तक:
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72.90% मतदाता — सफलतापूर्वक मैप हुए
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27.10% मतदाताओं — की मैपिंग बाकी
जिला निर्वाचन अधिकारियों को कहा गया है कि यह कार्य शीघ्रतम पूर्ण करें, ताकि नोटिस और विलोपन की नौबत कम आए।
नए वोटरों का रजिस्ट्रेशन धीमा — आयोग ने गहरी नाराजगी जताई
समीक्षा बैठक में पाया गया कि:
▪ फॉर्म-6 (नया मतदाता) बहुत कम संख्या में जमा हो रहे हैं।
यह चिंता इसलिए भी है क्योंकि विधानसभा चुनावों से पहले यह बहुत महत्वपूर्ण चरण है। इसलिए:
2025 की सूची में जिनका नाम नहीं है — उनसे तुरंत फॉर्म-6 भरवाएं
1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष होने वाले सभी युवाओं — को मतदाता रजिस्ट्रेशन में शामिल करें
आयोग ने जिलों को निर्देशित किया है कि युवा मतदाताओं की अनदेखी न हो।
कितने जिलों में हुआ डिजिटाइजेशन पूरा?
प्रदेश के:
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9 जिले
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88 विधानसभा क्षेत्र
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1,31,308 बूथ
पर गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन 100% पूरा हो चुका है।
इस बड़े अभियान का प्रभाव — 3 करोड़ नाम हटने पर होगा भारी राजनीतिक असर
अगर आयोग की जांच में चिह्नित 18.48% मतदाताओं की एंट्री गलत पाई जाती है, तो:
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यूपी में 3 करोड़ वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते हैं।
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यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर भी असामान्य रूप से बड़ा है।
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कई जिलों में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
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स्थानांतरित, मृतक और डुप्लीकेट वोटरों की एंट्री हटने से सूची ज्यादा शुद्ध और अपडेटेड बनेगी।
अगली प्रक्रिया
आयोग ने स्पष्ट किया है कि:
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पुनः सत्यापन की रिपोर्ट जल्दी भेजी जाए
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गलत तरीके से हटाए गए नामों को बहाल किया जाए
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बीएलओ की जिम्मेदारी तय होगी
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जिलों की प्रगति की दोबारा समीक्षा की जाएगी
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।
