लंपी रोग से बचाव के लिए जिले में पहुँची 71 हजार वैक्सीन की दूसरी खेप
ज्ञानपुर। जिले में लंपी वायरस संक्रमण से मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए पशुपालन विभाग ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान की तैयारी तेज कर दी है। शनिवार को विभाग को 71 हजार डोज की दूसरी खेप लखनऊ से प्राप्त हुई है। यह खेप आने के तुरंत बाद इसे जिले के विभिन्न अस्पतालों और ब्लॉक स्तर के केंद्रों पर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
चार महीने पहले आई थी पहली खेप, 2910 मवेशियों को लग चुका है टीका
जिले में इससे पहले चार महीने पूर्व लंपी वैक्सीनेशन के लिए 30 हजार डोज आई थीं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक 2910 मवेशियों का टीकाकरण किया जा चुका है। टीके की मांग बढ़ने के बाद विभाग ने उच्चाधिकारियों से अतिरिक्त खेप उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, जिसके बाद यह नई खेप जिले को आवंटित की गई।
जिलेभर में वैक्सीन वितरण की तैयारी शुरू
नई खेप के वितरण को लेकर विभाग ने प्लान तैयार किया है—
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पांच प्रमुख पशु अस्पतालों को 5500 डोज
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सात ब्लॉक स्तरीय पशु चिकित्सालयों को 7300 डोज भेजी जाएंगी।
बाकी वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से अभियान के दौरान उपयोग किया जाएगा।
गांव-गांव पहुंचेगी टीकाकरण टीम, 11 टीमें गठित
पशुपालन विभाग ने वैक्सीनेशन ऑपरेशन को गति देने के लिए 11 विशेषज्ञ टीमों का गठन किया है। ये टीमें गांव-गांव जाकर मवेशियों की जांच करेंगी और लोंपी के लक्षण दिखने पर तुरंत टीका लगाएंगी। प्रत्येक टीम को आवश्यक उपकरण, दवाएं और रिपोर्टिंग फॉर्म उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
लंपी रोग क्या है? क्यों बढ़ रही चिंता?
लंपी स्किन डिजीज एक तेजी से फैलने वाला संक्रामक रोग है जो मुख्यतः गोवंश को प्रभावित करता है। वायरस के कारण शरीर पर गांठें बन जाती हैं, बुखार होता है और कई बार दूध उत्पादन पर भी असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंपी का समय पर टीकाकरण और लक्षणों की शुरुआती पहचान ही इससे बचाव का प्रभावी तरीका है।
विभाग कर रहा नियमित मॉनिटरिंग
विभाग की ओर से बताया गया है कि टीकाकरण अभियान की लगातार निगरानी की जाएगी। सभी टीमों को प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट जिला पशुपालन कार्यालय में जमा करनी होगी। किसी भी संदिग्ध केस की जानकारी तुरंत विभागीय अधिकारियों को देने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों से की गई अपील
पशुपालन विभाग ने किसानों और पशुपालकों से अपील की है कि यदि उनके मवेशियों में—
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बुखार,
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त्वचा पर गांठें,
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दूध कम होना,
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आँख-नाक से स्राव
जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय को सूचना दें।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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