सामुदायिक शौचालयों की बदहाली: करोड़ों खर्च के बाद भी ताला, गंदगी और जमी घास

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सामुदायिक शौचालयों की दुर्दशा: करोड़ों खर्च, लेकिन जमीनी स्थिति बदतर

ज्ञानपुर। जिले की 546 ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालय अब रखरखाव के अभाव में जर्जर होते जा रहे हैं। जिस उद्देश्य से इनका निर्माण हुआ था—खुले में शौच से मुक्ति—वही लक्ष्य ग्राम पंचायतों की लापरवाही और अफसरों की उदासीनता से पटरी से उतरता दिख रहा है।

जांच में दो शौचालय बंद, सभी में गंदगी का अंबार

शुक्रवार को संवाद एजेंसी की टीम ने सुबह आठ से दस बजे के बीच लोकमनपुर, बवईं, संवरपुर, कुलमनपुर, बिछियां, बेलहुआ और कलीपुर गांवों के सामुदायिक शौचालयों का स्थलीय निरीक्षण किया।

  • संवरपुर और बवईं के शौचालय बंद मिले।

  • शेष गांवों में शौचालयों के बाहर और भीतर गंदगी का अंबार था।

  • कुछ परिसरों में घास का जंगल उग आया है, जिससे साफ है कि महीनों से सफाई नहीं हुई।

  • बेलहुआ का शौचालय पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण उपयोग लायक नहीं है।

  • कलीपुर में शौचालय दिन में बंद और केवल सुबह-शाम खुलता है

ग्राम पंचायतों में शौचालयों की यह स्थिति ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है।

6 से 12 लाख की लागत से बने शौचालय, लेकिन रखरखाव नदारद

2014 में केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद स्वच्छ भारत मिशन के तहत पहले लगभग 2.80 लाख एकल शौचालय बनाए गए। इसके बाद सामुदायिक शौचालयों का निर्माण शुरू हुआ, जिस पर 70 से 75 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
जिले में आबादी के अनुपात के अनुसार 661 सामुदायिक शौचालय बनाए जाने का लक्ष्य था, जिनमें से लगभग 650 तैयार हैं।

इनकी सफाई और रखरखाव के लिए समूहों के माध्यम से केयरटेकर नियुक्त किए गए हैं, लेकिन ज्यादातर शौचालयों की हालत बताती है कि निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से फेल है।

ग्रामीणों की आवाज

कलीपुर के ग्रामीण मुनीब का कहना है—
“पहले तो शौचालय दिनभर खुला रहता था, लेकिन अब बीच-बीच में तालाबंदी होने लगी है। लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।”

स्थानीय लोगों का आरोप है कि

  • नियमित सफाई नहीं होती

  • केयरटेकर कई जगह सिर्फ नाम के लिए हैं

  • ग्राम पंचायतें निरीक्षण नहीं करतीं

  • शिकायतें करने पर भी समाधान नहीं मिलता

स्वच्छ भारत मिशन को लग रहा पलीता

सामुदायिक शौचालयों की यह दुर्दशा न केवल सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि रखरखाव के अभाव में कितना बड़ा सार्वजनिक धन व्यर्थ जा रहा है। खुले में शौच से मुक्त होने का लक्ष्य अब भी अधूरा है और ग्रामीण मजबूर होकर पुराने तरीकों का सहारा ले रहे हैं।

ग्रामीणों की मांग

  • नियमित सफाई व निगरानी

  • क्षतिग्रस्त शौचालयों की तत्काल मरम्मत

  • दिनभर शौचालय खुला रखने की व्यवस्था

  • पंचायतों की जवाबदेही तय हो

अगर जिम्मेदार विभाग समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई ये संरचनाएँ बेकार साबित होंगी और मिशन का लक्ष्य अधूरा ही रह जाएगा।

Ashu Jha : Bharat Kranti News
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

Leave a Comment

और पढ़ें

Read More Articles