रामपुर 2007 आतंकी हमला: इतने लोगों की जान लेने वाले कैसे बरी? शहीद CRPF जवान की बेटी का सवाल, जानिए पूरा सच
Rampur 2007 Terror Attack Verdict | High Court Decision | Martyr Family Reaction | Bharat Kranti News Exclusive
पृष्ठभूमि: जब गोलियों की गूंज से दहल उठा था रामपुर
31 दिसंबर 2007 की रात करीब 2 बजे, उत्तर प्रदेश के रामपुर में सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों ने कंट्रोल रूम, मेस और गेट पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी।
इस हमले में 7 सीआरपीएफ जवान और 1 नागरिक की मौत, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) पर डाली गई थी। जांच एजेंसियों ने बाद में पांच आतंकियों को गिरफ्तार किया था।
2007 से 2025 तक — 18 साल में क्या हुआ?
हमले के 12 साल बाद, यानी 2019 में रामपुर की सत्र अदालत ने
चार आरोपियों को फांसी की सजा और एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
मौत की सजा पाने वाले आरोपी थे:
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मोहम्मद शरीफ (दिल्ली निवासी)
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सबाउद्दीन (बिहार निवासी)
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इमरान शहजाद (पाकिस्तानी नागरिक)
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मोहम्मद फारूक (पाकिस्तानी नागरिक)
जबकि जंग बहादुर (नेपाल मूल का निवासी) को उम्रकैद की सजा दी गई थी।
लेकिन 2025 में, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपराध साबित करने में नाकाम रहा।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा —
“अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सबूत पर्याप्त नहीं हैं कि अभियुक्तों की संलिप्तता को आतंकवादी गतिविधि से जोड़ा जा सके। मात्र हथियार बरामद होने से आतंकवाद साबित नहीं होता।”
अदालत ने केवल आर्म्स एक्ट की धारा 25 में दोषी मानते हुए
उनकी पहले से काटी गई सजा को समायोजित (Adjusted) कर दिया।
इसका मतलब है कि वे अब रिहा हो चुके हैं।
शहीद की बेटी दीपा चौधरी की पीड़ा
शहीद सीआरपीएफ जवान मनवीर सिंह की बेटी दीपा चौधरी, जो अब 26 साल की हैं, ने कहा —
“मैं सिर्फ आठ साल की थी जब मेरे पिता शहीद हुए। अब अदालत का यह फैसला हमारे लिए किसी सदमे से कम नहीं है। क्या यही न्याय है? जिन्होंने देश के सिपाही को मारा, वे अब आज़ाद घूम रहे हैं!”
दीपा वर्तमान में मेरठ में अपनी मां पिंकी देवी के साथ रहती हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश के हर शहीद परिवार के जख्म ताज़ा कर गया है।
पिंकी देवी का बयान: “जांचकर्ताओं ने न्याय की हत्या की”
दीपा की मां पिंकी देवी ने कहा —
“जांचकर्ता इतने लापरवाह थे कि उन्होंने ऐसे लोगों को बरी कर दिया।
मेरे पति की शहादत व्यर्थ हो गई। हम आज भी उसी दर्द में जी रहे हैं।”
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 18 साल बाद भी इस देश में शहीद परिवारों को न्याय क्यों नहीं मिल पा रहा?
हमले के बाद जांच की स्थिति
हमले के बाद पुलिस और ATS ने दावा किया था कि गिरफ्तार आतंकियों के पास से
एके-47 राइफल, कारतूस, हैंड ग्रेनेड और अन्य हथियार बरामद किए गए थे।
हालांकि अदालत में ये सबूत तकनीकी खामियों और जांच में त्रुटियों के चलते कमजोर पड़ गए।
पुलिस ने यह भी स्वीकार किया कि सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक रिपोर्ट पर्याप्त रूप से कोर्ट में पेश नहीं की जा सकी।
शहीद परिवारों की मांग — “दोबारा जांच कराई जाए”
दीपा चौधरी और उनकी मां ने केंद्र सरकार से अपील की है कि
इस मामले की पुनः जांच (Reinvestigation) या CBI से निगरानी में समीक्षा कराई जाए।
उन्होंने कहा कि अगर आतंकियों को सजा नहीं मिली, तो
“भविष्य में कोई भी आतंकी देश पर हमला करने से नहीं डरेगा।”
देश के लिए शहीद — याद करें मनवीर सिंह और उनके साथियों को
2007 के उस हमले में शहीद हुए जवानों में शामिल थे:
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कांस्टेबल मनवीर सिंह (मेरठ)
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हेड कांस्टेबल मोहनलाल (हरियाणा)
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सीआरपीएफ जवान रामअवतार (राजस्थान)
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सिपाही चंद्रपाल (मध्य प्रदेश)
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जवान हेमराज (उत्तराखंड)
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कांस्टेबल देवेन्द्र (बरेली)
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जवान जितेंद्र (बिहार)
इनकी याद में हर साल 31 दिसंबर को रामपुर सीआरपीएफ कैंप में श्रद्धांजलि दी जाती है।
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

